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साईं गान (Sai Gaan)

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                साईं गान साईं साईं नाम पुकारो, श्रद्धा रखो ना हिम्मत हारो। याद करो तो साईं मिलेंगे, फरियाद करो झोली भर देंगे। कृपासिंधु जग पालनकर्ता, दयामयी बंधु दुखहर्ता। प्रेम का जग को पाठ पढ़ाया ऊंच-नीच का भेद मिटाया।   श्रद्धा सबूरी साईं सार, साईं की लीला अपरम्पार। साईं आशा का आधार, साईं करते कृपा अपार।।   शरण तिहारी आए आज, साईं लगा दो बेड़ा पार। जिस हृदय साईं का नाम, साईं बनाते बिगड़े काम।   अनगिनत साईं गुणगान, सब मिल गाओ साईं गान। शीश झुका करूं कोटि प्रणाम हृदय से बोलो ऊँ साईं राम।। 🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏 By:-Dr.Anshul Saxena  

होली की बोली (Holi ki Boli)

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Holi ki Boli होली बोले कितनी बोली, रंगो की पुड़िया जब रिश्तो में घोली, कहीं प्यार बड़े जब रंग चढ़े, कहीं भीगी भीगी हंसी ठिठोली। कहीं उमंग के ढोल कहीं मस्ती की टोली कहीं मिलन-उत्सव  कहीं आनंद भरी झोली गुजिया भी बोले ममता की बोली आसमां में सजती रंगो की रंगोली। चंदन की खुशबू में लिपटा गुलाल, कोई होता मतवाला तो कोई होता लाल, कोई किसी का हो गया कोई किसी की हो ली, कोई बुरा ना मानो ये होली है होली।। Dr.Anshul Saxena 

नारी ना हारी ( Naari Na Haari)

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Naari Na Haari जिसके बिना जन जीवन अधूरा, वो जीवन से पहले ही कब तक मरेगी? उस युग की सीता की अग्नि परीक्षा, इस युग की सीता ही कब तक करेगी? कन्या और देवी का करते हो पूजन, वह कन्या और देवी ही कब तक घुटेगी? साहसी विदुषी जब एकाकी असुरक्षित, नियमों के बंधन में कब तक बंटेगी? मर्यादा में रहकर मर्यादा उल्लंघन, अब तक सहा है कब तक सहेगी? निर्भीक असहाय द्रोपदी दामिनी, समाज की पीड़ा में कब तक रहेगी? सुंदर सुयोग्य गुणी सुकन्या, दहेज की अग्नि में कब तक जलेगी? पुरुष से कंधा मिलाकर चली है, अहम के कांटो पर कब तक चलेगी? पुरुष का वर्चस्व जिसने है जन्मा, थमी ना कभी,कभी ना थमेगी सम्मान की अधिकारी नारी ना हारी, आगे बढ़ी है आगे बढ़ेगी।। Dr.Anshul Saxena 

जगजननी नारी (Jag Janani Naari)

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जगजननी नारी  अंदर से मजबूत बड़ी है, ऊपर से कोमल लगती है। वीरों की जननी है जो, जिगरों का जिगरा रखती है। एक परिवार में जन्म ले ये दूजे का पालन करती है। डोली में जाती जिस घर, अर्थी में बाहर निकलती है। राखी और ममता इससे, खुशियों से आंगन भरती है। त्यौहार की रौनक इससे ही हर पर्व को पूरा करती है। सुंदर निर्मल भावुक ऐसी, नीर नयन में भरती है। पूजोगे तो दुर्गा ये, छेड़ा तो काली बनती है। दीपक की ज्योति इससे ही, इससे ही पूजा और हवन, जगजननी नारी शक्ति को, आभार भरा शत शत नमन।। 🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏 Dr.Anshul Saxena 

हिन्दी (Hindi Bhasha)

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हिन्दी (Hindi Bhasha) हिंदी मेरी मातृभाषा, हिंदुत्व का सम्मान, अपनाएंगे जब मिल सारे रख पाएंगे इसका मान।। भाषा में आभूषण हिंदी, जैसे भारत माँ की बिंदी, हिंदी है अभिमान देश का, हिंदी से ही देश का मान।। बन प्रहरी यह प्रण लो सारे, हिंदी झुके ना हिंदी हारे, हिंदी से ही देश की रक्षा, हिंदी सुरक्षा कवच समान, आन बान देश की शान, हिंदी है तो हिंदुस्तान।। By:-Dr.Anshul Saxena

संहार- कलयुग के रावण का

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     पराक्रमी और अभिमानी, दंभी पंडित और ज्ञानी, मर्यादा को हरने वाला, उस युग में राम से मरता है।। सत्य धर्म की अमर विजय को  जन-जन स्मरण करता है, न्याय धर्म की रक्षा हेतु, अब कोई राम ना बढ़ता है। त्रेता युग का रावन तो  इस युग में भी मरता है। कलयुग के रावण का क्या  जो गली गली में पलता है।। नैतिकता का करे पतन  मर्यादा का उल्लंघन पापी,दुष्ट,दुराचारी दुष्कर्म से जो ना डरता है। सत्य असत्य की आंख मिचोली, धर्म न्याय की लगती बोली, मन से रावण पहन मुखौटा, हनन मान का करता है।। कलयुग के हर रावण का  आओ मिल संहार करें।। विजयदशमी के अवसर को, सार्थक और साकार करें, श्रीराम से ले प्रेरणा, कलयुग का उद्धार करें। मानवता के धर्म का पालन , हर जन का कर्म ये बनता है, सतकर्म धर्म को माने जो, हर जन्म सफल वो करता है।। By:Dr.Anshul Saxena

सच्चा गुरु (Sachcha Guru)

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गुरु वही जो सीख सिखा दे, जीने की तरकीब बता दे, जीवन पथ के अंधियारों में,  आशाओं की ज्योत जला दे।। लक्ष्य भेदकर नभ छूने सा, शंखनाद मन में करवा दे, भूले भटके अनजानों को, सही मार्ग को जो दिखला दे।। गुरु वही जो सीख सिखा दे... ज्ञान जो बाँटे बहुत मिलेंगे, गुरु कहो जिसे बहुत मिलेंगे, दृढ़ संकल्प की नवलय का नवगीत तुम्हारे ह्रदय जगा दे, पुस्तक ज्ञान से ऊपर उठ, जो जीने का उद्देश्य बता दे, कर नमन उन गुरुओं को, आदर से यह शीश नवा दे।। शिक्षा का व्यापार करे जो, स्वार्थ हेतु आघात करे जो, आशाओं और अभिलाषाओं का, निर्मम तुषारापात करे जो; कोमलता को रौंद रौंदकर, शिक्षक भक्षक बन कर जब, मर्यादा का अर्थ भुलाकर,  आदर्शों को जो झुठला दे; ऐसे ढोंगी गुरुओं को सतगुरु सत का पाठ पढ़ा दे🙏 उन अंतर्मन के रावण पर  राम नाम की विजय करा दे।।🙏 By-Dr.Anshul Saxena  इस कविता को एक बार सुनिए जरूर-

आजकल हर शख़्स व्यस्त है?

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                                                                                                         आज कल हर शख़्स व्यस्त है,               कोई हकीक़त में तो कोई यूं ही व्यस्त है,               कोई व्यस्तता में तो कोई मस्ती में मस्त है,               कहीं मजबूरी तो कहीं ज़िम्मेदारी की गिरफ़्त है।                      आज कल हर शख़्स व्यस्त है।               कौन कितना और कहां व्यस्त है?               कि वक़्त पर वक़्त देने का नहीं वक़्त है,             ...

ज़िंदगी

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                कभी तू हंसाती है ,कभी तू रुलाती है ,                ऐ ज़िंदगी तू कितना सताती है ।।                तुझे जीने की ख़्वाहिश रेत की तरह ,                मेरी बंद मुट्ठी से फ़िसल जाती है ,                मेरी ग़ुजारिशें तुझे थामना चाहें,                तू बड़ी रफ़्तार से चलती ही जाती है ।                ऐ ज़िंदगी तू कितना सताती है ।।                क्यों हम अपनों से रूठ जाते हैं ?                क्यों ग़ैरों के साथ, तुझे हंस के बिताते हैं?                कभी तू समझ नहीं आती,                कभी तू मुझे समझ नहीं पाती है।   ...

आभार- हिंदी कविता(Aabhar)

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                                               आभार                       मम्मी की जान वो;                       तो पापा की वो परी,                       सब की लाडली;                       बड़े नाज़ से पली ।                       गोद से मेरी उतर,                       जब तू कदम चलने लगी,                       कैसे भेजूं दूर तुझे ,                       यह चिंता खलने लगी ।                 ...

नारी शक्ति (Naari Shakti)

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नारी शक्ति शक्ति भी तू , भक्ति भी तू, तू मान है  महान  है, प्रेम का सागर है तू , तू गुणों की खान है। स्नेह वात्सल्य वाहिनी, तू ही है जीवन दायनी, भाव का भंडार तू, तेरी जान से जहान है। कोमल मधुर मधुरिमा, ब्रह्मांड में तू अग्रिमा, अर्धांगिनी पुत्री या मां, तेरे मान में सम्मान है। अपार शक्ति संचिता, देवी स्वरूप अंकिता, सर्वश्रेष्ठ निर्माण तू , तू असीमित ज्ञान है। नारी तुझे प्रणाम है।। नारी तुझे प्रणाम है।। Dr.Anshul Saxena