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खाली हाथ

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चैन ओ सुकूँ को छोड़कर फ़ुर्सत की चाह में, रिश्तों का गला घोंट कर दौलत की राह में, जेबें तिजोरी भर रहे वो जानते नहीं, जाना तो ख़ाली हाथ है उसकी पनाह में।। Dr.Anshul Saxena 

जल है तो कल है

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जल है तो कल है नमस्कार पाठकों! आज पूरा देश जल के संकट से जूझ रहा है।ऐसी दशा में मैंने कुछ पंक्तियां जल के संदर्भ में लिखी हैं। जल है तो कल है -इन पंक्तियों के द्वारा मैं लोगों तक यह महत्वपूर्ण संदेश पहुंचाना चाहती हूँ। जल है तो कल है वर्षा की फ़ुहार है जल से, धरती की बहार है जल से, जल जीवन-आधार हमारा, जल बिन सूना ये जग सारा।। एक बूंद चातक को जैसे, प्यासे को जल अमृत वैसे, जल को व्यर्थ ना कभी बहाना, लो संकल्प है इसे बचाना।। Dr.Anshul Saxena 

हिन्दी (Hindi Bhasha)

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हिन्दी (Hindi Bhasha) हिंदी मेरी मातृभाषा, हिंदुत्व का सम्मान, अपनाएंगे जब मिल सारे रख पाएंगे इसका मान।। भाषा में आभूषण हिंदी, जैसे भारत माँ की बिंदी, हिंदी है अभिमान देश का, हिंदी से ही देश का मान।। बन प्रहरी यह प्रण लो सारे, हिंदी झुके ना हिंदी हारे, हिंदी से ही देश की रक्षा, हिंदी सुरक्षा कवच समान, आन बान देश की शान, हिंदी है तो हिंदुस्तान।। By:-Dr.Anshul Saxena

संहार- कलयुग के रावण का

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     पराक्रमी और अभिमानी, दंभी पंडित और ज्ञानी, मर्यादा को हरने वाला, उस युग में राम से मरता है।। सत्य धर्म की अमर विजय को  जन-जन स्मरण करता है, न्याय धर्म की रक्षा हेतु, अब कोई राम ना बढ़ता है। त्रेता युग का रावन तो  इस युग में भी मरता है। कलयुग के रावण का क्या  जो गली गली में पलता है।। नैतिकता का करे पतन  मर्यादा का उल्लंघन पापी,दुष्ट,दुराचारी दुष्कर्म से जो ना डरता है। सत्य असत्य की आंख मिचोली, धर्म न्याय की लगती बोली, मन से रावण पहन मुखौटा, हनन मान का करता है।। कलयुग के हर रावण का  आओ मिल संहार करें।। विजयदशमी के अवसर को, सार्थक और साकार करें, श्रीराम से ले प्रेरणा, कलयुग का उद्धार करें। मानवता के धर्म का पालन , हर जन का कर्म ये बनता है, सतकर्म धर्म को माने जो, हर जन्म सफल वो करता है।। By:Dr.Anshul Saxena

उम्र और सोच- एक कहानी (Umra Aur Soch- Ek Kahani)

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उम्र और सोच- एक कहानी   सुबह-सुबह चाय की चुस्कियों के साथ दो पुराने दोस्त अपनी पुरानी यादों को ताजा करते हुए आपस में बातचीत कर रहे थे। "वो भी क्या दिन थे शर्मा लगता है कल की ही बात थी जब मैंने ऑफिस ज्वाइन किया था और फिर पलट के वापस नहीं देखा। और आज देखो रिटायर भी हो गए। मानो वक्त गति के पंख लगाकर उड़ता ही चला गया। आज अपने बेटे विकास को देखता हूं तो अपनी छवि नज़र आती है, उसके काम करने के अंदाज में.. अब तो बस आराम करना है। मैं,तुम, खुराना और अपने कुछ दोस्त एक दूसरे के साथ अपना वक्त बिताया करेंगे क्यों सही कहा ना?" शर्मा जी:  "एकदम सही कहा वर्मा जी हा हा हा हा.." "पुराने दोस्तों से याद आया यार शर्मा अपने रमेश और किशोर कहां होंगे कैसे दिखते होंगे? अरसा हो गया उन को देखे हुए। है ना?" वर्मा जी ने उत्सुकतापूर्वक पूछा। तभी वर्मा जी का बेटा विकास अपना फोन लेने ड्राइंग रूम में आया और बोला, "पापा मैंने कब से आपका Facebook पर अकाउंट बनाया हुआ है आप चेक ही नहीं करते।" वर्मा जी: "अरे बेटा अब ये social media वगैरह सीखने की उम्र थोड़े ना रह गय...

अनोखे नौजवान (Anokhe Naujawan)

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अनोखे नौजवान                               बैठे-बैठे खा लें इनसे                               मेहनत कौन कराए                             काला चश्मा नीची जींस                              सब पर रौब जमाएं।                            बाप की जेबें रोज ये ऐंठें                             धुआं रोज उड़ाएं                            ऐसे वैसे ऐश करा लो                             पैसे कौन कमाए। ...