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Never Judge a Book by its Cover

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  Never Judge a Book by its Cover  एक बार एक 24 साल का लड़का ट्रेन में अपने पिता के साथ यात्रा कर रहा था। वह बहुत ही उत्तेजित और उत्साहित था। इस ट्रेन में उनके साथ एक दंपति बैठा हुआ था। वह लड़का बार-बार खिड़की से बाहर देखकर अत्यंत खुश हो रहा था। अचानक से वह लड़का जोर-जोर से ताली बजाकर उत्साहित होता हुआ बोल पापा देखिए पेड़ पीछे जाते जा रहे हैं और हम आगे जा रहे हैं। उसके पिता मुस्कुरा दिए लेकिन साथ बैठे दंपति को बहुत ही आश्चर्य हुआ। कितना बड़ा लड़का किस तरह से बच्चों की तरह व्यवहार कर रहा है?  लेकिन वह दंपति चुपचाप बैठा उस लड़के को देखता रहा। थोड़ी देर बाद ही वह लड़का फिर से उत्साहित होकर अपने पिता से बोा पापा देखिए बादल हमारे साथ-साथ चल रहे हैं। अब इस बार उसे दंपति से रहा नहीं गया और उन्होंने उसे लड़के के पिता से कहा की आप अपने बेटे को किसी डॉक्टर को क्यों नहीं दिखाया। इतनी बड़ी उम्र में भी यह कैसी बच्चों जैसी हरकतें कर रहा है और आप सिर्फ मुस्कुरा रहे हैं। इस पर उसे लड़के के पिता ने उसे दंपति से कहा कि हम अभी डॉक्टर क्या से ही आ रहे हैं। आपसे कुछ दिनों पहले तक यह लड़का ब्ल...

Hindi Kavita Saath (हिंदी कविता साथ)

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साथ  कठिनाइयां भी हों सरल हार हो जाए विफल मझधार में कश्ती खड़ी आगे भी जाएगी निकल तुम हाथ तो दो।। बीत जाएंगे ये पल फिर नहीं मिलेंगे कल हौसला फिर हो सबल आशा का खिल जाए कमल तुम साथ तो दो।। By- Dr.Anshul Saxena 

सलीक़ा और तरीक़ा (Saleeka aur Tareeka)

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  हर किसी से बात करने का सलीक़ा और तरीक़ा अलग अलग होता है।  कुछ लोग आपके बिना कहे ही सब कुछ सुन लेते हैं और कुछ लोग आपके बार बार कहने पर भी आपकी बात को सुनना नहीं चाहते। आपकी तहज़ीब और अदब को लोग अपनी मनमानी करने के लिए ग्रीन सिगनल की तरह लेते हैं। ऐसे में आपको अपने कहने का तरीका और सलीका दोनों ही बदलने पड़ते हैं।  तुम्हें बस कितना कहूंगी कि तुम जो भी कहते हो तहज़ीब में रहते हो सुनने वाले बड़ा ग़ौर से सुनते हैं खामोशी तोड़ो तहज़ीब छोड़ो बहरे ज़रा ज़ोर से सुनते हैं। 

हिंदी को स्वीकार करो (Hindi ko sweekar karo)

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 हिंदी को स्वीकार करो  (Hindi ko sweekar karo) वंचित अपने अधिकारों से, छलनी अपनों के वारों से, औरों पे पड़ती भारी जो। अपने ही देश में हारी वो।। एबीसी के चक्कर में, हस्ताक्षर में या अक्षर में, खोयी ऐसी हर दफ्तर में, वो निजी हो या सरकारी हो।। अंग्रेज़ी पर इतराते हम और हिंदी से घबराते हम चलो हिंदी को अपनाते हैं, चलो 2 का बटन दबाते हैं, एबीसीडी सीख ली हमने, अब क ख ग भी सिखाते हैं। हेलो हाय को बाय करो, नमस्कार को प्यार करो, हिंदुस्तान के वासी हो, हिंदी को स्वीकार करो।। Dr.Anshul Saxena 

सफ़र (Safar)

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 सफ़र (Safar) सफ़र का अर्थ ही होता है चलते जाना और जिंदगी भी चलने का नाम है।  कभी-कभी पास की मंजिल भी दूर लगती है और कभी-कभी दूर दूर तक भी मंज़िल नहीं दिखती है। ये ऐसा सफ़र है जिसमें आपको मंज़िल का भले ही ना पता हो लेकिन आपके क़दम चलते रहने चाहिए चाहे वह कितने भी थक क्यों ना जाएं। आसाँ नहीं ये जिंदगी मुश्किल ये सफ़र है, दिखती नहीं मंज़िल कहीं चलना तो मग़र है, हर सांस में इक आस है और आस में मेरी दुआ, ऐ ख़ुदा सुन ले ज़रा सुनता तू अगर है।।

छोटा जीवन (Chchota Jeevan)

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 जीवन  (Jeevan) हम सभी का जीवन एक गति का पर्याय है अर्थात चलते रहने का नाम ही जीवन है। जीवन का सफर हमेशा आसान नहीं होता। ये अपने साथ तमाम उतार-चढ़ाव लेकर आता है।  जीवन के उतार-चढ़ाव के कारण हो सकता है हमारी गति धीमी हो जाए लेकिन हमें चलते रहना होता है। जिस प्रकार एक चींटी कभी हार नहीं मानती और अपना भोजन जुटाने के लिए निरंतर प्रयासरत रहती है उसी तरह हमें अपने जीवन से हार ना मानते हुए उसे बेहतर बनाने के लिए निरंतर प्रयासरत रहना चाहिए। चींटी सा छोटा जीवन खुद से भारी खुद का मन थकता ये फिर चलता ले आशा निष्ठा और लगन।। Dr.Anshul Saxena 

मिलावट (Milavat)

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  मिलावट (Milavat) शब्दों से शब्दों को जहां तोला जाता है, चोट दे फिर घाव को टटोला जाता है, खामोश रह वहां न करना हाल-ए-दिल बयां, मरहम में भी जहां जहर घोला जाता है।।

Khand (खंड)

 Khand (खंड) हमारे देश को आज़ादी मिले हुए तो कई वर्ष बीत गए लेकिन विचार अभी भी जंजीरों में जकड़े हुए हैं। क्या नेता क्या जनता?  जब तक धर्म और जात पात का कंकड़ आंखों में पड़ा रहेगा सामने सब कुछ किरकिरा ही नजर आएगा। आंख के बदले आंख में तो पूरा देश ही अंधा हो जाएगा। चल रहे हैं झुंड में, सिर उठा घमंड में। विचार है जंजीर में सोच मुट्ठी बंद में।। धर्मार्थ में या स्वार्थ में, जात में  हर बात में बांटते और काटते देश खंड खंड में।। मुश्किल से आजाद हुए, बंटवारे उसके बाद हुये, कब तक रहोगे जंग में? कब चलोगे संग में? बांटते और काटते, देश खंड खंड में।।

सकारात्मकता और नकारात्मकता - एक अंतर्द्वंद् (A Conflict)

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  सकारात्मकता और नकारात्मकता - अंतर्द्वंद् (A Conflict) प्रत्येक व्यक्ति के मस्तिष्क में प्रतिदिन एक द्वंद सा रहता है। अक्सर यह द्वंद सकारात्मकता और नकारात्मकता के मध्य होता है।  यह सकारात्मकता और नकारात्मकता परस्पर जल और अग्नि के समान होते हैं। जल जो शीतलता देता है अग्नि जो यदि दहक जाए तो सब दहन कर देती है। इस द्वंद में यदि जल की मात्रा अधिक हो तो वह अग्नि को बुझा देता है पर यदि अग्नि की मात्रा अधिक हो तो वह जल को सुखा देती है। क्या आप जानते हैं कि आपके अंदर होने वाले इस सकारात्मकता और नकारात्मकता के द्वंद में कौन विजयी होता है। इस द्वंद में वही विजयी होता है जिसकी मात्रा को आप बढ़ावा देते हैं। दोस्तों अपने अंदर की नकारात्मकता की अग्नि को इतना मत बढ़ने दीजिए कि वह आपके अंदर की जल रुपी सकारात्मकता को भी सुखा दे और सब दहन कर दे। स्वयं भी सकारात्मक रहिये और औरों को सकारात्मकता की शीतलता प्रदान कीजिए। Be positive and let the positivity win inside you.

तालिबानी सोच (Talibani Soch)

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       तालिबानी सोच  नमस्कार! इस दुनिया में हो रहे तालिबानी खेल को तो हम सभी देख रहे हैं लेकिन आश्चर्य और अफसोस उन लोगों के लिए होता है जो कहने को तो हिंदुस्तानी है मगर सोच से तालिबानी है। मेरी पूरी कविता "तालिबानी सोच"को सुनने के लिए नीचे दिए गए वीडियो को जरूर देखें। जय हिंद जय भारत🙏   लानत है उन गद्दारों पे, जो प्यार करें हथियारों से, जो पीठ में चाकू घोंपते हैं, बदतर हैं वो हत्यारों से।। कहते इस देश में डरते हैं, आज़ादी-आज़ादी करते हैं, असली आज़ादी का मतलब, ज़रा पूछो उन अफ़गानों से।। मुमकिन है जान बचा लें वो, आतंकी खूनी मंजर से, कैसे यह मुल्क़ बचाओगे? कुछ उन झूठे मक्कारों से।। जो कहने को हिंदुस्तानी हैं, पर सोच से तालिबानी हैं, हल ढूंढो कल ग़र बचना है इनके आतंकी वारों से।।            Dr.Anshul Saxena 

स्वामी विवेकानंद : सुविचार (Swami Vivekananda Suvichaar)

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  भारतीय संस्कृति व दर्शन को जन जन तक पहुंचाने वाले सनातन अध्यात्म चेतना के प्रतीक, प्रकाण्ड विद्वान, युवाओं के प्रेरणास्रोत, युगपुरुष स्वामी विवेकानंद जी की पुण्यतिथि पर कोटि कोटि नमन🙏 आइए स्वामी जी के कुछ अनमोल सुविचारों पर प्रकाश डालते हैं। "एक समय में एक काम करो, और ऐसा करते समय अपनी पूरी आत्मा उसमें डाल दो और बाकी सब कुछ भूल जाओ। " "सत्य को हज़ार तरीकों से बताया जा सकता है, फिर भी हर एक सत्य ही होगा।" "उठो, जागो और तब तक मत रुको, जब तक लक्ष्य की प्राप्ति ना हो जाये।।" "हम वो हैं जो हमें हमारी सोच ने बनाया है, इसलिए इस बात का ध्यान रखिये कि आप क्या सोचते हैं। शब्द गौण हैं, विचार रहते हैं, वे दूर तक यात्रा करते हैं।" ख़ुद को कमज़ोर समझना सबसे बड़ा पाप है। "जब तक जीना है, तब तक सीखना है, अनुभव ही जगत में सर्वश्रेष्ठ शिक्षक है"

मन की आवाज़ (Man Ki Awaaz)

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            मन की आवाज़ आप लोगों ने यह बखूबी सुना होगा कि  सबसे बड़ा रोग क्या कहेंगे लोग। यह रोग तो कोरोना के रोग से भी बड़ा है। सही ग़लत छोड़कर लोगों की परवाह कई बार आपको आगे बढ़ने से रोकती रहती है। आखिर यह परवाह कितनी उचित है? उतनी ही जब तक आप अपनी अंतरात्मा की आवाज सुन सकें। आपकी अंतरात्मा कभी आपसे झूठ नहीं बोलती। सामाजिक दबाव में इतना मत आइये कि आप सही गलत का अंतर भूल जाएं। दोस्तों बाहर बहुत शोर है कभी इत्मीनान से बैठिए और खुद से बातें कीजिए। सही ग़लत की सारी परतें खुद-ब-खुद  खुल जाएंगी।🙏 इतना तो उजाला रखो तुम, कि अपनी परछाई दिखाई दे। बस उतना ही सुनना लोगों की, कि अपनी आवाज़ सुनाई दे।।

Disabled or Abled?

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  You call them disabled who are specially abled to keep their heart pure for everyone by ignoring your inability to see their ability. Dr. Anshul Saxena 

Autism Awareness Day

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 Today is World Autism Awareness Day.  God has blessed us with beautiful life. Let's make somebody's life better by understanding and accepting their differences.

भाषा और बेटी (Bhasha Aur Beti)

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  जिस देश में जन्मी बड़ी हुई, कोने में छुप के खड़ी हुई, स्थान तलाशे वो अपना, कागज़ में सिमटी पड़ी हुई।। अपनों की पीढ़ी ठगती गई, ग़ैरों की भाषा बढ़ती गई, शिक्षा के जगत में पिछड़ गई, अपनों से जैसे बिछड़ गई।। तुम ठुकराओगे तो कौन अपनाएगा? लगातार तिरस्कार कब रुक पाएगा? भाषा और बेटी गर्व हैं सम्मान हैं, देश का ये गौरव देश का ये मान हैं, सत्य चुभेगा कड़वा लगेगा, अपने ही घर में ये पराई समान हैं।। Dr.Anshul Saxena 

क़त्ल (Katl)

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 क़त्ल (Katl) बाहर शोर और मेला है, अंदर मन मौन अकेला है, जब अंदर यह घबराता है, एक खंजर खून बहाता है। रोक लो खून को बहने से, अपनों को घायल होने से, अनजाने में अपनों का कोई, अपना कातिल बन जाता है।। कोई भरा हुआ है भावों से, बस भावुक सा हो जाता है, तुम ना समझे तो क्या होगा, यह सोच के वो कतराता है।। थोड़ा हंस लो थोड़ा सह लो, कुछ वो कह दे कुछ तुम कह लो, किसका क्या चला जाता है, ग़र इक जीवन बच जाता है।।

परवाह (Parvah)

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आज संपूर्ण विश्व में कोरोना वायरस से फैला संक्रमण चिंता का विषय बना हुआ है। सुरक्षा की दृष्टि से देश भर में किये गये लॉक डाउन से कोई भूख से जूझ रहा है तो कोई अकेलेपन से जूझ रहा है। कोई व्यस्त है तो कोई खालीपन से जूझ रहा है। ऐसे में हम सभी दूर रहते हुए एकजुट रहकर यदि कुछ कर सकते हैं तो वह है परवाह। तो इन्हीं परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए प्रस्तुत है आज की हिंदी कविता   परवाह यह जीवन रैन बसेरा है, सुख दुख का यहां डेरा है, मर कर तुम साथ चलो ना भले, जीते जी साथ निभा देना।। कहीं परिवारों का मेला है, कोई अपना दूर अकेला है, तुम पास भले ना जा पाओ, पर दूर से साथ निभा देना।। भावों में कोई बह जाए तो तुम बाँध बना देना।। तन से साथ रहो न भले, पर मन से साथ निभा देना।। कहीं तड़प है भूखे पेटों की, कहीं कमी नहीं है नोटों की, जिससे जितना बन पाये, उन भूखों तक पहुंचा देना।। मानवता की खेती का, इस धरती पर जहाँ सूखा हो, प्रेम दया के मेघों को, उस धरती पर बरसा देना।। Dr. Anshul Saxena

जागो जागो हिंदुस्तान (Jaago Jaago Hindustan)

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सावधान हो सावधान, जागो जागो हिंदुस्तान।। कोरोना से युद्ध हमारा, रहा नहीं इतना आसान।। बंद हो रहे ऑफिस सारे, धर्मस्थल शिक्षण संस्थान।। कोरोना से युद्ध हमारा, रहा नहीं इतना आसान।। थोड़ी सी भी चूक हमारी, हम पर पड़ जाएगी भारी, जान है तो है जहान, अब नहीं बनो अनजान। कोरोना से युद्ध हमारा, रहा नहीं इतना आसान।। जो कर दे बेड़ा पार, वो पतवार चाहिए। तलवार सी तैयारी वाली, धार चाहिए। सतर्कता संयम और सहयोग, यही हमारा योगदान।। कोरोना से युद्ध हमारा रहा नहीं इतना आसान।।

जीवन (Jivan)

                       जीवन  कितनों को अपने मिले नहीं, कुछ सपने पूरे हुए नहीं। कुछ एक वक्त ही खाते हैं, कुछ बिन छत के सो जाते हैं। जो जीवन भर मायूस रहे, वे जीवन क्या जी पाते हैं। कुछ चंद बची कुछ सांसो में, जीवन क्या बतलाते हैं। भोर सुहानी आई है, 'तुम हो'यह संदेशा लाई है। ईश्वर का आभार करो, सपनों को साकार करो। आशा की सामर्थ्य भरो, जीवन को ना व्यर्थ करो। 🌻😊🙏🌻

ऐ ज़िंदगी तेरी उम्र बहुत छोटी है

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ऐ ज़िंदगी तेरी उम्र बहुत छोटी है तू कभी हंसती है  तो कभी रोती है ए ज़िंदगी तेरी उम्र बहुत छोटी है। भुला दो सारे शिकवे गिले जो अपने हो उन्हें लगा लो गले जी भर के जी लो आज अभी क्या पता कल मिले ना मिले कल की ना दे ख़बर सपने मग़र बोती है ऐ ज़िंदगी तेरी उम्र बड़ी छोटी है।। किसी से रूठे हो तो उसे मना लो दिल में हो प्यार तो उसे जता दो क्या लिया क्या दिया ये हिसाब छोड़कर जो हो तुम्हारे पास बेहिसाब लुटा दो कर लो अगर क़दर तो आंसू भी मोती है ऐ ज़िंदगी तेरी उम्र बहुत छोटी है।। Dr.Anshul Saxena