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ऐ ज़िंदगी तेरी उम्र बहुत छोटी है

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ऐ ज़िंदगी तेरी उम्र बहुत छोटी है तू कभी हंसती है  तो कभी रोती है ए ज़िंदगी तेरी उम्र बहुत छोटी है। भुला दो सारे शिकवे गिले जो अपने हो उन्हें लगा लो गले जी भर के जी लो आज अभी क्या पता कल मिले ना मिले कल की ना दे ख़बर सपने मग़र बोती है ऐ ज़िंदगी तेरी उम्र बड़ी छोटी है।। किसी से रूठे हो तो उसे मना लो दिल में हो प्यार तो उसे जता दो क्या लिया क्या दिया ये हिसाब छोड़कर जो हो तुम्हारे पास बेहिसाब लुटा दो कर लो अगर क़दर तो आंसू भी मोती है ऐ ज़िंदगी तेरी उम्र बहुत छोटी है।। Dr.Anshul Saxena

खाली हाथ

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चैन ओ सुकूँ को छोड़कर फ़ुर्सत की चाह में, रिश्तों का गला घोंट कर दौलत की राह में, जेबें तिजोरी भर रहे वो जानते नहीं, जाना तो ख़ाली हाथ है उसकी पनाह में।। Dr.Anshul Saxena 

ऐ ज़िंदगी (E Zindgi)

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      E Zindgi ऐ ज़िदगी ऐसे ना सताया कर जिन आंखों में हो सपने वहां थोड़ा ठहर जाया कर छोटा तेरा सफ़र औदा बड़ा मगर तेरी अहमियत जीते जी बताया कर।। मायूसी उदासी दरक़़िनार कर, कभी बेवजह भी मुस्कुराया कर, कभी चेहरे पे चेहरा लगाया कर, एहतियात बरत सौदागरों से, राज़- ए-दिल सब को ना बताया कर।। Dr. Anshul Saxena

जल है तो कल है

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जल है तो कल है नमस्कार पाठकों! आज पूरा देश जल के संकट से जूझ रहा है।ऐसी दशा में मैंने कुछ पंक्तियां जल के संदर्भ में लिखी हैं। जल है तो कल है -इन पंक्तियों के द्वारा मैं लोगों तक यह महत्वपूर्ण संदेश पहुंचाना चाहती हूँ। जल है तो कल है वर्षा की फ़ुहार है जल से, धरती की बहार है जल से, जल जीवन-आधार हमारा, जल बिन सूना ये जग सारा।। एक बूंद चातक को जैसे, प्यासे को जल अमृत वैसे, जल को व्यर्थ ना कभी बहाना, लो संकल्प है इसे बचाना।। Dr.Anshul Saxena 

सुनहरा बचपन

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                                                 सुनहरा बचपन  शायद आप लोगों में से कुछ लोगों का बचपन भी ऐसे ही बीता हो।तो चलिए ताज़ा कर लेते हैं कुछ यादें सुनहरा बचपन की बत्ती के जाने पर महफ़िल लगाना पंखे को झलना गप्पें लड़ाना🌞 बर्फ के गोले की चुस्की और कुल्फी 🍡 लूडो और शतरंज की बाजी लगाना🎲⚄ शाम को छतों पर पानी छिड़काना🚿🌊 रंग बिरंगी पतंगें उड़ाना🔶️🔷️ चोर सिपाही या छुप्पन छुपाई कभी गुड्डे और गुड़ियों की शादी कराना 🤴👸 दरी पर गद्दे और चादर बिछाना तारों से तारों में चेहरे बनाना🌟 ठंडा सा तकिया और प्यारी सी नींद🛌 चांदनी रात में मौसम सुहाना🌛 लोगों का लोगों से मिलना मिलाना अपनों या गैरों से रिश्ते निभाना बीत गया बचपन ज़ारी है अब भी उन सुनहरी यादों का ताता लगाना।🙇‍♀️ By: Dr.Anshul Saxena

साईं गान (Sai Gaan)

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                साईं गान साईं साईं नाम पुकारो, श्रद्धा रखो ना हिम्मत हारो। याद करो तो साईं मिलेंगे, फरियाद करो झोली भर देंगे। कृपासिंधु जग पालनकर्ता, दयामयी बंधु दुखहर्ता। प्रेम का जग को पाठ पढ़ाया ऊंच-नीच का भेद मिटाया।   श्रद्धा सबूरी साईं सार, साईं की लीला अपरम्पार। साईं आशा का आधार, साईं करते कृपा अपार।।   शरण तिहारी आए आज, साईं लगा दो बेड़ा पार। जिस हृदय साईं का नाम, साईं बनाते बिगड़े काम।   अनगिनत साईं गुणगान, सब मिल गाओ साईं गान। शीश झुका करूं कोटि प्रणाम हृदय से बोलो ऊँ साईं राम।। 🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏 By:-Dr.Anshul Saxena  

ये उन दिनों की बात है

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ये उन दिनों की बात है, जब हम छोटे बच्चे थे, उम्र में थोड़े कच्चे थे, पर दिल के बेहद सच्चे थे।। ये उन दिनों की बात है रिश्तो में था अपनापन, सबका एक ही था आंगन, मिलजुल कर सब रहते थे, सुख-दुख सब मिल सहते थे।। ये उन दिनों की बात है अपनों के अपने सब थे, मां-बाबा में रब थे, परिवारों के मतलब थे, मिलना जुलना कम हो चाहे, दिल के बंधन पक्के थे।। ये उन दिनों की बात है... आज की बात जैसे दिन और रात जिससे मतलब उसका साथ पैसे के बिन सब है फीका माथा देखके होता टीका चलते नोट काम के रिश्ते बिना काम के खोटे सिक्के फोन में दोस्तों का मेला है फिर भी इंसान अकेला है भागदौड़ सब हो गए व्यस्त अपनों के लिए नहीं है वक्त सच्चा रंग पुराना है दिखावे का ज़माना है आज की बात निराली बात इसमें नहीं उन दोनों की बात। By: Dr. ANSHUL SAXENA