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हिंदी को स्वीकार करो (Hindi ko sweekar karo)

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 हिंदी को स्वीकार करो  (Hindi ko sweekar karo) वंचित अपने अधिकारों से, छलनी अपनों के वारों से, औरों पे पड़ती भारी जो। अपने ही देश में हारी वो।। एबीसी के चक्कर में, हस्ताक्षर में या अक्षर में, खोयी ऐसी हर दफ्तर में, वो निजी हो या सरकारी हो।। अंग्रेज़ी पर इतराते हम और हिंदी से घबराते हम चलो हिंदी को अपनाते हैं, चलो 2 का बटन दबाते हैं, एबीसीडी सीख ली हमने, अब क ख ग भी सिखाते हैं। हेलो हाय को बाय करो, नमस्कार को प्यार करो, हिंदुस्तान के वासी हो, हिंदी को स्वीकार करो।। Dr.Anshul Saxena 

नारी (Naari)

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  नारी   एक नारी की शक्ति का आंकलन करना किसी के बस की बात नहीं है। एक असीम शक्ति का नाम है नारी। जो हर चुनौती हर संघर्ष को हंस के पार करती हैं।  बेटियां अक्सर बेटा बन जाती है लेकिन बेटे बेटियां नहीं बन पाते। अपने घर को बसाने के लिए वह जन्म से मिली अपनी पहचान को हंसते-हंसते त्याग देती है। अपने सपने अपनों के लिए हंसी खुशी न्योछावर कर देती है। अपनी हर भूमिका असाधारण रूप में निभाने वाली नारी को कोई चुनौती नहीं रोक सकती। तुम मान दो तो मान में  सम्मान देती है। जन्म क्या पहचान क्या   वो जान देती है। ना भूल कर यह भूलना  उसे आंकते हो तो छोटी बड़ी हर बात पर  उसे जांचते हो तो  रिश्ते कभी बंधन में  उसे बांटते हो तो जीतेगी वो हर हाल में  जब ठान लेती है।।

समझ दिल की (Samajh Di Ki)

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   समझ दिल की (Samajh Di Ki) यह जिंदगी भी बड़ी अजीब है। ग़ौर से देखो तो प्यार के लिए कम पड़ जाती है और नफ़रत के लिए बहुत बड़ी लगती है। कमाल की बात तो यह है कि हम जिंदगी भर उन्हीं लोगों से लड़ने में मनमुटाव में उलझे रहते हैं जो हमारे आसपास होते हैं या हमारे बेहद करीब होते हैं। सच तो यह है कि इस दिखावे की दुनिया में आपको सच्चे लोग मिल जाएं तो ख़ुद को बहुत ख़ुशकिस्मत समझ लो। कोई ऐसा जो आपको सुनता हो, आपकी फ़िक्र करता हो, आपसे आपके दिल का हाल पूछता हो तो उसे ज़िंदगी भर संजो कर रखिएगा। ऐसी रिश्तों की क़द्र करिएगा जो आपको आप जैसे हैं वैसे अपनाते हैं, जो आपको छोटी-छोटी बातों के लिए आंकते नहीं है, जो आपसे दिल से जुड़ते हैं स्वार्थ से नहीं। ठीक ही है कि कहाँ दर्द कम होता है किसी के हाल पूछने से बस तसल्ली हो जाती है कि कोई अपना है। आपको पता है कभी-कभी दिल दिमाग से ज्यादा समझदारी से काम करता है। वह खुद को हल्का रखने के लिए लोगों के दिखावे को समझते हुए भी नजरअंदाज़ कर देता है।😄 करो महफ़ूज़ वो रिश्ता जो मिल के हाल लेता है। जहां तुम डगमगाते हो तुम्हें वह ढ़ाल देता है। बड़ा नादान है य...

साथ (Saath)

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 साथ (Saath)   मुश्किलें आई है तो हल  निकलेंगे, जो कल भी निकले थे फिर कल निकलेंगे, रुक गए थे कदम जो मंजिल की राह में, साथ होंगे आप तो फिर चल निकलेंगे।।

बिकाऊ रिश्ते (Bikau Rishte)

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 बिकाऊ रिश्ते   आज का ज़माना पहले से कुछ अलग है। महंगाई के इस दौर में हर चीज महंगी बिकती है। इस सूची में रिश्ते भी शामिल हैं। जितना महंगा रिश्ता उतनी मेहमान नवाज़ी।  पहले ज़माने में सुविधाएं भले ही कम थी लेकिन रिश्तों में ठहराव और गहराई होती थी। मिलना जुलना औपचारिक नहीं होता था। त्योहारों में खोखला पन नहीं था। पहले सामने झगड़े होते थे लेकिन मनमुटाव क्षणिक होता था। दिलों की मिठास कम नहीं होती थी। अब दिलों की खटास दिखावे की चाशनी में परोसी जाती है। कह सकते हैं कि  दिल में अब नमी नहीं है  पर दिखावे में कमी नहीं है। जिसको यह बात अभी तक समझ ना आई हो तो नासमझ होना ही बेहतर है। नासमझी ही बेहतर है ना होना समझदार  समझ गए तो समझोगे रिश्तों का व्यापार आज के समय में महाकवि तुलसीदास जी का कथन हमेशा याद रखना चाहिए आवत ही हरषै नहीं नैनन नहीं सनेह।  तुलसी तहां न जाइये कंचन बरसे मेह। जिस समूह में शिरकत होने से वहां के लोग आपसे खुश नहीं होते और वहां लोगों की नजरों में आपके लिए प्रेम या स्नेह नहीं है, तो ऐसे स्थान या समूह में हमें कभी शिरकत नहीं करना चाहिए, भले ही वहां स...

हर घर तिरंगा ( Har Ghar Tiranga)

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  हर घर तिरंगा  ( Har Ghar Tiranga) आजादी का अमृत उत्सव, देश भक्ति में रंग बिरंगा, देश प्रेम का तिलक लगा सब, हर घर में लहराओ तिरंगा।। आतंक पनपने ना पाए, घर के भेदी घर को जाएं, आओ हम ऐसे मिल जाएं, ना फ़साद ना हो फिर दंगा। हर घर में लहराओ तिरंगा।। हर अतिथि का हो अभिनंदन, हर धर्म का करते हम वंदन, इस देश की माटी जैसे चंदन, देश प्रेम पावन ज्यों गंगा। हर घर में लहराओ तिरंगा।।

सफ़र (Safar)

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 सफ़र (Safar) सफ़र का अर्थ ही होता है चलते जाना और जिंदगी भी चलने का नाम है।  कभी-कभी पास की मंजिल भी दूर लगती है और कभी-कभी दूर दूर तक भी मंज़िल नहीं दिखती है। ये ऐसा सफ़र है जिसमें आपको मंज़िल का भले ही ना पता हो लेकिन आपके क़दम चलते रहने चाहिए चाहे वह कितने भी थक क्यों ना जाएं। आसाँ नहीं ये जिंदगी मुश्किल ये सफ़र है, दिखती नहीं मंज़िल कहीं चलना तो मग़र है, हर सांस में इक आस है और आस में मेरी दुआ, ऐ ख़ुदा सुन ले ज़रा सुनता तू अगर है।।