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Showing posts from March, 2026

अहम का वहम (Aham ka Vaham)

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 अहम ने यह वहम पाल रखा है  कि सब कुछ मैंने संभाल रखा है।  अहम का वहम क्या आप एक ऐसी यात्रा के बारे में जानते हैं जिसका कोई अंत नहीं है यदि कोई अंत है तो वह है सिर्फ और सिर्फ पछतावा। उस यात्रा को यानी उस ट्रिप को कहते हैं ' EGO TRIP' EGO TRIP क्या है? कुछ लोग अक्सर इस यात्रा पर अपना एक झूठा अहम लेकर निकल पड़ते हैं और इस अहम को पूरा करने के लिए वह किसी भी हद तक सामने वाले को चोट पहुंचाने से पहले या उसे कोई हानि पहुंचाने से पहले एक बार भी नहीं सोचते।  ऐसे लोग अपने अहम में इतने अंधे हो जाते हैं कि उन्हें इसके सिवा कुछ नहीं दिखाई देता। ऐसे लोग सदैव खुद को सही मानते हैं और वे सोचते हैं कि जैसे सब वो ही जानते हैं और सारी परिस्थितियों को उन्होंने संभाल रखा है। अहम तो महाज्ञानी परम शक्तिशाली रावण का भी नहीं टिका था। ईश्वर ऐसे खोखले अहंवादियों को सद्बुद्धि दे। इस संसार में सब कुछ वैसे ही चलेगा जैसे चलता है। इस दुनिया को चलाने वाला कोई अहमवादी नहीं वरन परमपिता परमेश्वर है।  जय श्री राम!🙏 By: Dr.Anshul Saxena 

मर्यादा के उस पर जाना नहीं (Maryada)

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       मर्यादा के उस पर जाना नहीं आज मैं अपनी कविता के माध्यम से अपने देश की तमाम बेटियों बच्चियों और बहनों को एक संदेश देना चाहती हूं।  प्रेम एक बहुत ही सुंदर भाव है और आदिकाल से प्रेम का अनेक रूपों में वर्णन किया गया है। प्रेम का अर्थ पाना, मारना या मिटाना नहीं बल्कि प्रेम का अर्थ है त्याग। प्रेम का सही अर्थ समझना है तो राधा कृष्ण के प्रेम से अधिक सुंदर कोई और उदाहरण नहीं हो सकता। आधुनिक पीढ़ी प्रेम की भावना को ठीक से समझती नहीं और महज एक आकर्षण को प्रेम समझ बैठी है और कुछ लोग क्षणिक भाव में किसी भी हद तक मर्यादा को तोड़ने में आतुर हो जाते हैं।  यह सब आज बहुत आगे बढ़ चुका है लेकिन आज भी प्रेम में जब भी मर्यादा लांघी जाती है तो समाज बेटियों बच्चियों पर आरोप लगाने से पीछे नहीं हटता। ऐसे में बच्चियों के माता-पिता या स्वयं बच्चियों का एक कर्तव्य बनता है कि वह प्रेम भाव में अपनी मर्यादा को ना तोड़ें।  तो अब मैं कविता के माध्यम से अपना संदेश प्रस्तुत करना चाहती हूं। आशा है मेरा संदेश देश की बछिया बेटियों, बच्चियों  और उनके माता-पिता तक अवश्य पहुंचेगा।...