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फर्क़ - मर्द और औरत का

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  फर्क़ मर्द और औरत का  आधुनिक युग में बहुत से लोग कहते हैं कि एक मर्द और औरत में कोई फर्क नहीं होता और वह तो कंधे से कंधा मिलाकर चल रहे हैं। क्या वास्तव में ऐसा संभव हो सका है? बहुत से क्षेत्र में नारी ने पुरुष के साथ कन्धे से कंधा मिलाया है लेकिन यथार्थ के धरातल पर या यूँ कहें वास्तविक जीवन में बहुत सी ऐसी नारियां है जो जीवन में बहुत कुछ करना चाहती हैं लेकिन कभी परिस्थितियों वश, कभी कर्तव्यनिष्ठा या कभी अपनी जिम्मेदारियां की वजह से वे वह नहीं कर पाती जो वे कर सकती हैं। अपना नाम, पहचान, घर-परिवार सब को छोड़ने के बाद भी अंतत: कई बार नारी को अपने सपने भी अपनों के लिए छोड़ने पड़ जाते हैं।  तो बस इसी संदर्भ में यहां मैंने कुछ अभिव्यक्त करने का प्रयास किया है। बचपन में सपनों को उड़ान मिलती है  अपनों से अपनेपन की मुस्कान मिलती है यहाँ दूसरे घर की वहाँ पराई रहती है  छिन जाता है वो नाम जो पहचान मिलती है बड़े होते-होते उसके पंख कट जाते हैं।  कभी गृहस्थी तो कभी जिम्मेदारी में बँट जाते हैं  उसे तो अपनी जिंदगी जीने का भी हक नहीं है  और कहते हो कि मर्द और औरत...

नारी - एक चिंगारी ( Naari Ek Chingari)

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 एक चिंगारी नारी अभिमान की आवाज़ में कभी रीति में रिवाज़ में भक्ति है जो उस नारी को शक्ति जो उस चिंगारी को जितना भी उसे दबाओगे एक ज्वाला को भड़काओगे। उस अंतर्मन में शोर है बस चुप वो ना कमज़ोर है जितना तुम उसे मिटाओगे उतना मजबूत बनाओगे। बचपन में थामा था आंचल वो ही पूरक वो ही संबल तुम उसके बिना अधूरे हो तुम नारी से ही पूरे हो जितना तुम अहम बढ़ाओगे अपना अस्तित्व मिटाओगे। By- Dr.Anshul Saxena 

नारी (Naari)

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  नारी   एक नारी की शक्ति का आंकलन करना किसी के बस की बात नहीं है। एक असीम शक्ति का नाम है नारी। जो हर चुनौती हर संघर्ष को हंस के पार करती हैं।  बेटियां अक्सर बेटा बन जाती है लेकिन बेटे बेटियां नहीं बन पाते। अपने घर को बसाने के लिए वह जन्म से मिली अपनी पहचान को हंसते-हंसते त्याग देती है। अपने सपने अपनों के लिए हंसी खुशी न्योछावर कर देती है। अपनी हर भूमिका असाधारण रूप में निभाने वाली नारी को कोई चुनौती नहीं रोक सकती। तुम मान दो तो मान में  सम्मान देती है। जन्म क्या पहचान क्या   वो जान देती है। ना भूल कर यह भूलना  उसे आंकते हो तो छोटी बड़ी हर बात पर  उसे जांचते हो तो  रिश्ते कभी बंधन में  उसे बांटते हो तो जीतेगी वो हर हाल में  जब ठान लेती है।।

गृहणी (Grahani)

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  गृहणी (Grahani) समाज में अपनी अहम भूमिका निभाने वाली एक ऐसी स्त्री जो शिक्षित भी है, काबिल भी है, जिसके अपने सपने भी हैं लेकिन उन सब से ऊपर उसके अपने भी हैं। जो अपना घर सजाने और बच्चों को बनाने में अपने सपने और अपनी ख्वाहिशों का हंसते-हंसते बलिदान दे देती है और फिर भी उसके बारे में बहुत कुछ अनकहा रह जाता है।  मेरा एक छोटा सा प्रयास है उस स्त्री के बारे में कुछ कहने का जिसका पूरा घर ऋणी होता है और जिसे गृहणी कहते हैं। कभी तंगी में कभी मंदी में कभी बंधन में पाबंदी में कभी घर गृहस्थी के धंधे में कभी कर्तव्यों के फंदे में, ख्वाहिश उसकी झूल गई। अपनों की परवाह करने में, वह खुद खुद को ही भूल गई। दूर पास के रिश्ते में महंगा राशन हो सस्ते में बच्चों और उनके बस्ते में दिन भर वो उलझी रहती है खाली रहती हो, क्या करती हो? ताने सुनती रहती है। तानों के ताने-बाने में घर अपना स्वर्ग बनाने में जीवन अपना ही भूल गयी। अपनों की परवाह करने में, वह खुद खुद को ही भूल गई। दिन दिन भर वो काम करे, सोचे वो कब आराम करे?🤔 छुट्टी नहीं  पगार नहीं, उसका कोई इतवार नहीं। पुरुषों से ज...

माँ- जीवन दायिनी (Maa - Ek Jeevan Dayini)

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 माँ - एक जीवन दायिनी एक स्त्री जब एक जन्म देती है तब दूसरा जन्म लेती है- जिसे ईश्वर की सर्वश्रेष्ठ रचना कहते हैं यानी कि एक माँ । स्त्री का यह दूसरा जन्म उसके अंदर एक अद्भुत परिवर्तन लाता है। एक साधारण स्त्री निश्चल भाव से ओतप्रोत हो जाती है.. निस्वार्थ स्नेह, वात्सल्य, प्रेम और त्याग की मूरत बन जाती है। माँ के ऊपर तो दुनिया के समस्त काव्य ग्रंथ भी कम पड़ जाएंगे लेकिन फिर भी कुछ पंक्तियां एक मां का लिए 🙏 माँ ही जीवन दायिनी, स्नेह त्याग का रूप। माँ से पूजा आरती, माँ ही मंगल धूप। माँ ही शीतल छांव है, जीवन ये कड़कती धूप। सब बदले संसार में, माँ ना बदले रूप। माँ केवल एक जीवनदायिनी नहीं है बल्कि भविष्य निर्माता भी है। एक माँ ही कच्ची मिट्टी के समान अपने बच्चों में गुण, संस्कार, शिक्षा और व्यवहार की नींव  डालती है। एक बार अपने बच्चों को अच्छे से अच्छा जीवन देने के लिए ना केवल अपनी नींद बल्कि अपने सपने भी हंसते हंसते न्योछावर कर देती है। दुनिया के लिए माँ एक माँ होती है लेकिन बच्चों के लिए उनकी माँ ही दुनिया होती है। माँ से शिक्षा,मिलते गुण, संस्कार व्यवहार। माँ से बनता मायका, माँ ...

Sashakt Naari ( सशक्त नारी)

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 सशक्त नारी एक नारी के जीवन के विविध रंग जितने दिखते हैं उससे कहीं अधिक गहरे होते हैं। नारी का अस्तित्व उसकी योग्यता या अयोग्यता को सिद्ध नहीं करता बल्कि जीवन में उसके द्वारा किए गए त्याग और उसकी प्राथमिकताओं के चुनाव को दर्शाता है। कहते हैं जीवन में सपना हो तो एक ज़िद होनी चाहिए और इस ज़िद पर डट कर अड़े रहना होता है। लेकिन एक नारी कभी सपने हार जाती है तो कभी सपनों को पूरा करने में अपने हार जाती है। नारी तो कभी अपने बच्चों में अपने सपने ढूंढ लेती है तो कभी परिस्थितियों से सामंजस्य बिठाकर अपनी खुशियों का बहाना ढूंढ लेती है। ऐसे में कभी कभी वह परिस्थितियों से छली जाती है तो कभी अपनों से ठगी जाती है। नारी के त्याग को उसकी कमज़ोरी समझने वालों के लिए  प्रस्तुत हैं मेरी यह चार पंक्तियां- ज़िद थी उड़ान की मगर अड़ नहीं पाई, मतलबी चेहरों को कभी पढ़ नहीं पाई, तुम क्या हराओगे उसे जो हर हार जीती है, अपनों की बात थी तो बस लड़ नहीं पाई।।

ज्वाला शक्ति (Jwala Shakti)

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               ज्वाला शक्ति  आज का दिन एक विशेष दिन है। आज का दिन उस नारी शक्ति को सम्मान देने का दिन है जो हर दिन सम्मान की अधिकारी है।   आज का दिन ऐसे लोगों की सोच बदलने का दिन है जो नारी को अबला समझते हैं। लेकिन यही नारी जब कन्या के रूप में जन्म लेती है तो घर आंगन को खुशियों से भर देती है। जब पत्नी बनकर किसी के जीवन में जाती है तो एक मकान को घर बना देती है। मां बनकर किसी को जन्म देती है और जीवनदायिनी बन जाती है।   वह पुरुष क्या जो नारी का सम्मान ना करें। जो नारी स्वयं से पहले अपनों को रखती है।अपनी इच्छाओं को अपने दायित्वों के लिए त्याग देती है। लोग जीवन भर उसके कर्तव्यों को गिनाना नहीं भूलते। उसके अधिकारों और सम्मान का हनन करने वाली अपने पतन से भी नहीं डरती। आज की नारी ने पुरुषों से कंधे से कंधा मिला लिया है। क्या पुरुष भी नारी से कंधे से कंधा मिला पाएंगे? ईश्वर की ऐसी अद्भुत कृति को पूरे सम्मान के साथ हम सभी को शुभकामनाएं देना चाहिए🙏 समस्त नारियों और पुरुषों को जिनके जीवन में नारियों की अहम भूमिका है नारी दिवस की हार्दिक शुभ...

नारी ना हारी ( Naari Na Haari)

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Naari Na Haari जिसके बिना जन जीवन अधूरा, वो जीवन से पहले ही कब तक मरेगी? उस युग की सीता की अग्नि परीक्षा, इस युग की सीता ही कब तक करेगी? कन्या और देवी का करते हो पूजन, वह कन्या और देवी ही कब तक घुटेगी? साहसी विदुषी जब एकाकी असुरक्षित, नियमों के बंधन में कब तक बंटेगी? मर्यादा में रहकर मर्यादा उल्लंघन, अब तक सहा है कब तक सहेगी? निर्भीक असहाय द्रोपदी दामिनी, समाज की पीड़ा में कब तक रहेगी? सुंदर सुयोग्य गुणी सुकन्या, दहेज की अग्नि में कब तक जलेगी? पुरुष से कंधा मिलाकर चली है, अहम के कांटो पर कब तक चलेगी? पुरुष का वर्चस्व जिसने है जन्मा, थमी ना कभी,कभी ना थमेगी सम्मान की अधिकारी नारी ना हारी, आगे बढ़ी है आगे बढ़ेगी।। Dr.Anshul Saxena 

जगजननी नारी (Jag Janani Naari)

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जगजननी नारी  अंदर से मजबूत बड़ी है, ऊपर से कोमल लगती है। वीरों की जननी है जो, जिगरों का जिगरा रखती है। एक परिवार में जन्म ले ये दूजे का पालन करती है। डोली में जाती जिस घर, अर्थी में बाहर निकलती है। राखी और ममता इससे, खुशियों से आंगन भरती है। त्यौहार की रौनक इससे ही हर पर्व को पूरा करती है। सुंदर निर्मल भावुक ऐसी, नीर नयन में भरती है। पूजोगे तो दुर्गा ये, छेड़ा तो काली बनती है। दीपक की ज्योति इससे ही, इससे ही पूजा और हवन, जगजननी नारी शक्ति को, आभार भरा शत शत नमन।। 🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏 Dr.Anshul Saxena 

माँ -बेटी (Maa- Beti)

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 इस जहां का दिया हर जुल्म उठा जाऊंगी मैं,  जब बुलाएगी तू मुझे दौड़कर आऊंगी मैं,  हर दर्द की आंधी से तुझको बचा लाऊंगी मैं,  तेरी सुरक्षा के लिए तूफ़ान सह जाऊंगी मैं।  तेरे सुकून के लिए कई रात जग जाऊंगी मैं,  आंख बंद हो या खुली बस तुझे पाऊंगी मैं,  तेरी मुस्कुराहट के लिए हर दर्द सह जाऊंगी मैं,  उज्जवल भविष्य तुझको मिले और क्या चाहूंगी मैं।।  छोटी सी तेरी जीत से हर जीत जीत जाऊंगी मैं,   तेरी बोली तेरे भाव सबको समझाऊंगी मैं,  आत्मनिर्भर तू बने कुछ ऐसा कर जाऊंगी मैं,  फिर रहूं या ना रहूं बस धैर्य को पाऊंगी मैं।।  मंदिर मस्जिद गुरुद्वारे हर जगह जाऊंगी मैं,  हर सजदे में शीश नवा आशीष दे जाऊंगी मैं  तेरे जन्म से मुझको नया जन्म मिला है  इस जन्म को अंत तक तेरे नाम कर जाऊंगी मैं।। 🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏  By-Dr.Anshul Saxena 

नारी शक्ति (Naari Shakti)

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नारी शक्ति शक्ति भी तू , भक्ति भी तू, तू मान है  महान  है, प्रेम का सागर है तू , तू गुणों की खान है। स्नेह वात्सल्य वाहिनी, तू ही है जीवन दायनी, भाव का भंडार तू, तेरी जान से जहान है। कोमल मधुर मधुरिमा, ब्रह्मांड में तू अग्रिमा, अर्धांगिनी पुत्री या मां, तेरे मान में सम्मान है। अपार शक्ति संचिता, देवी स्वरूप अंकिता, सर्वश्रेष्ठ निर्माण तू , तू असीमित ज्ञान है। नारी तुझे प्रणाम है।। नारी तुझे प्रणाम है।। Dr.Anshul Saxena