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नारी - एक चिंगारी ( Naari Ek Chingari)

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 एक चिंगारी नारी अभिमान की आवाज़ में कभी रीति में रिवाज़ में भक्ति है जो उस नारी को शक्ति जो उस चिंगारी को जितना भी उसे दबाओगे एक ज्वाला को भड़काओगे। उस अंतर्मन में शोर है बस चुप वो ना कमज़ोर है जितना तुम उसे मिटाओगे उतना मजबूत बनाओगे। बचपन में थामा था आंचल वो ही पूरक वो ही संबल तुम उसके बिना अधूरे हो तुम नारी से ही पूरे हो जितना तुम अहम बढ़ाओगे अपना अस्तित्व मिटाओगे। By- Dr.Anshul Saxena 

जगजननी नारी (Jag Janani Naari)

जगजननी नारी 

Hindu kavita Jagjanani Naari about woman's power @expressionshub.co.in


अंदर से मजबूत बड़ी है,
ऊपर से कोमल लगती है।
वीरों की जननी है जो,
जिगरों का जिगरा रखती है।


एक परिवार में जन्म ले ये
दूजे का पालन करती है।
डोली में जाती जिस घर,
अर्थी में बाहर निकलती है।


राखी और ममता इससे,
खुशियों से आंगन भरती है।
त्यौहार की रौनक इससे ही
हर पर्व को पूरा करती है।


सुंदर निर्मल भावुक ऐसी,
नीर नयन में भरती है।
पूजोगे तो दुर्गा ये,
छेड़ा तो काली बनती है।


दीपक की ज्योति इससे ही,
इससे ही पूजा और हवन,
जगजननी नारी शक्ति को,
आभार भरा शत शत नमन।।

🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏
Dr.Anshul Saxena 

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