नारी - एक चिंगारी ( Naari Ek Chingari)

 एक चिंगारी नारी

हिंदी कविता नारी एक चिंगारी


अभिमान की आवाज़ में
कभी रीति में रिवाज़ में
भक्ति है जो उस नारी को
शक्ति जो उस चिंगारी को
जितना भी उसे दबाओगे
एक ज्वाला को भड़काओगे।

उस अंतर्मन में शोर है
बस चुप वो ना कमज़ोर है
जितना तुम उसे मिटाओगे
उतना मजबूत बनाओगे।

बचपन में
थामा था आंचल
वो ही पूरक
वो ही संबल
तुम उसके बिना अधूरे हो
तुम नारी से ही पूरे हो
जितना तुम अहम बढ़ाओगे
अपना अस्तित्व मिटाओगे।
By- Dr.Anshul Saxena 

Comments

Popular Posts

हर घर तिरंगा ( Har Ghar Tiranga)

गृहणी (Grahani)

बेटियाँ (Betiyan)

होली है (Holi Hai)

सम्मान- रिश्तों का(Samman Rishton Ka)

तानाशाही (Tanashahi)

Never Judge a Book by its Cover

अभिलाषा: एक बेटी की

सलीक़ा और तरीक़ा (Saleeka aur Tareeka)