मर्यादा के उस पर जाना नहीं (Maryada)
मर्यादा के उस पर जाना नहीं आज मैं अपनी कविता के माध्यम से अपने देश की तमाम बेटियों बच्चियों और बहनों को एक संदेश देना चाहती हूं। प्रेम एक बहुत ही सुंदर भाव है और आदिकाल से प्रेम का अनेक रूपों में वर्णन किया गया है। प्रेम का अर्थ पाना, मारना या मिटाना नहीं बल्कि प्रेम का अर्थ है त्याग। प्रेम का सही अर्थ समझना है तो राधा कृष्ण के प्रेम से अधिक सुंदर कोई और उदाहरण नहीं हो सकता। आधुनिक पीढ़ी प्रेम की भावना को ठीक से समझती नहीं और महज एक आकर्षण को प्रेम समझ बैठी है और कुछ लोग क्षणिक भाव में किसी भी हद तक मर्यादा को तोड़ने में आतुर हो जाते हैं। यह सब आज बहुत आगे बढ़ चुका है लेकिन आज भी प्रेम में जब भी मर्यादा लांघी जाती है तो समाज बेटियों बच्चियों पर आरोप लगाने से पीछे नहीं हटता। ऐसे में बच्चियों के माता-पिता या स्वयं बच्चियों का एक कर्तव्य बनता है कि वह प्रेम भाव में अपनी मर्यादा को ना तोड़ें। तो अब मैं कविता के माध्यम से अपना संदेश प्रस्तुत करना चाहती हूं। आशा है मेरा संदेश देश की बछिया बेटियों, बच्चियों और उनके माता-पिता तक अवश्य पहुंचेगा।...