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कारोबार (Karobaar)

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       कारोबार (Karobaar) बीते हुए वक्त से क्यों प्यार करती है, मासूमियत को छीन समझदार करती है, मुनाफ़े में देती दिल का सुकून मुझे, मेरी जिंदगी यादों का कारोबार करती है।। कभी रूठती मुझसे तो कभी प्यार करती है, ख्वाहिशों में खुशियों की दरक़ार करती है, कभी देती नक़द तो कभी उधार करती है, मेरी जिंदगी यादों का कारोबार करती है।। सो जाऊं मैं फिर भी जतन हज़ार करती है, ख्वाब में दस्तक यह बार-बार करती है, नींद ले फिर ख़्वाब दे सौदा करे ऐसा, मेरी ज़िंदगी यादों का कारोबार करती है।। Dr.Anshul Saxena

सुनहरा बचपन

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                                                 सुनहरा बचपन  शायद आप लोगों में से कुछ लोगों का बचपन भी ऐसे ही बीता हो।तो चलिए ताज़ा कर लेते हैं कुछ यादें सुनहरा बचपन की बत्ती के जाने पर महफ़िल लगाना पंखे को झलना गप्पें लड़ाना🌞 बर्फ के गोले की चुस्की और कुल्फी 🍡 लूडो और शतरंज की बाजी लगाना🎲⚄ शाम को छतों पर पानी छिड़काना🚿🌊 रंग बिरंगी पतंगें उड़ाना🔶️🔷️ चोर सिपाही या छुप्पन छुपाई कभी गुड्डे और गुड़ियों की शादी कराना 🤴👸 दरी पर गद्दे और चादर बिछाना तारों से तारों में चेहरे बनाना🌟 ठंडा सा तकिया और प्यारी सी नींद🛌 चांदनी रात में मौसम सुहाना🌛 लोगों का लोगों से मिलना मिलाना अपनों या गैरों से रिश्ते निभाना बीत गया बचपन ज़ारी है अब भी उन सुनहरी यादों का ताता लगाना।🙇‍♀️ By: Dr.Anshul Saxena

ये उन दिनों की बात है

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ये उन दिनों की बात है, जब हम छोटे बच्चे थे, उम्र में थोड़े कच्चे थे, पर दिल के बेहद सच्चे थे।। ये उन दिनों की बात है रिश्तो में था अपनापन, सबका एक ही था आंगन, मिलजुल कर सब रहते थे, सुख-दुख सब मिल सहते थे।। ये उन दिनों की बात है अपनों के अपने सब थे, मां-बाबा में रब थे, परिवारों के मतलब थे, मिलना जुलना कम हो चाहे, दिल के बंधन पक्के थे।। ये उन दिनों की बात है... आज की बात जैसे दिन और रात जिससे मतलब उसका साथ पैसे के बिन सब है फीका माथा देखके होता टीका चलते नोट काम के रिश्ते बिना काम के खोटे सिक्के फोन में दोस्तों का मेला है फिर भी इंसान अकेला है भागदौड़ सब हो गए व्यस्त अपनों के लिए नहीं है वक्त सच्चा रंग पुराना है दिखावे का ज़माना है आज की बात निराली बात इसमें नहीं उन दोनों की बात। By: Dr. ANSHUL SAXENA 

याद-पीहर की

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                याद-पीहर की  बचपन को जहाँ बोया था मैंने, यादों को जहाँ संजोया था मैंने, लाँघ वो दहलीज़ पीहर छोड़ा था मैंने, जब एक अटूट बंधन जोड़ा था मैंने, हर पुरानी चीज़ की जब बात आती है, ईंट और दीवार की भी याद आती है।। बरसों बरस जहाँ बिता दिये मैंने, बरसों से वो आंगन देखा नहीं मैंने, मन की चिररइया जब तब वहां घूम आती है, कभी कभी आँख जब झपकी लगाती है।। वो मोड़ वो राह तब छोड़ दी मैंने, ज़िम्मेवारी की चादर जब ओढ ली मैंने, वो हंसी ठिठोली आज भी बड़ा गुदगुदाती है, बीते हुए लम्हों की जब आवाज़ आती है।। भाई बहन वो बिछड़ी सहेली, झूठी शिक़ायतों वाली मीठी सी बोली, तपते बुख़ार में पिता की हथेली,  माँ की स्नेह और परवाह वाली झोली, कौन सी बेटी ये भूल पाती है पीहर की डोर कब छूट पाती है।। हर पुरानी चीज़ की जब बात आती है, ईंट और दीवार की भी याद आती है।।   By:- Dr. Anshul Saxena

तस्वीरें- नयी पुरानी ( Tasveeren Nayi Purani)

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                           पहले की तस्वीरों में एक याद हुआ करती थी, दिल-अज़ीज़ लम्हों की कुछ बात हुआ करती थी, कुछ यादों के बक्सों जैसी बार-बार खुलती थी, कुछ किताब में छिपी हुई एक राज़ हुआ करती थी।। कुछ इकट्ठे एक जगह अलमारी में रहती थी, जब खुलती थी बिन बोले ही बोल उठा करती थी, हम खुद को कम और औरों को उनमें ढूंढा करते थे, धुंधली हो या धूमिल सी, बेमोल हुआ करती थी।। मानो जैसे कोई खजाना संजो संजो कर रहती थी, बार-बार तो मुश्किल थी सोच-समझकर खिंचती थी, कुछ खुशियों की लहरों जैसी दिल छुआ करती थी, कुछ बन जाती कोई कहानी कुछ खास हुआ करती थी।। अब तो हर घंटों में तस्वीर खिंचा करती हैं, यादें हों या ना हों पर तस्वीर हुआ करती हैं, एक पोज़ के ढ़ेरों पोज़ सेल्फी में मिलते हैं, मेमोरी फुल होने पर डिलीट हुआ करती हैं।। जल्दी-जल्दी क्लिक होते ही शेयर हुआ करती है डीपी और  प्रोफाइल में बार-बार ये डलती है नया ज़माना नई तस्वीर वक़्त के साथ ही ढ़लती है पल में अच्छी लगती है पल पल में बदलती है।। By-Dr.Anshul Saxen...

मन की आशा

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                                                  उम्र ये ढ़लती जाती है                         सदाबहार मन रहता है                         ओझल होती आंखों में                         यादों का दर्पण रहता है।                         वो बेफ़िक्री वो चंचलता                         वो आशायें वो कोमलता                         अतीत के पन्रे पढ़ने को                         बार बार मन करता है।               ...