Ishq Andha Nahi (इश्क अँधा नहीं)

 

इश्क अँधा नहीं

हमारे देश में प्रेम को अनेकों रूपों में वर्णित किया गया है। कोई इसे इश्क कोई प्यार कोई मोहब्बत कहता है। किसी ने इसे एहसास बताया तो किसी ने रूहानी। कोई इश्क को इबादत कहता था तो कोई खुदा। 

यूँ ही यह दुनिया लैला मजनू को याद नहीं करती।
कोई कहता है कि इश्क अँधा होता है और जब कोई व्यक्ति इश्क में होता है तो उसे कुछ नहीं दिखाई देता। क्या वाकई इश्क अँधा होता है? 

इश्क अँधा नहीं


आज के दौर में इसका कुछ अलग ही रूप होता जा रहा है। महज़ आकर्षण इश्क नहीं हो सकता। आज लोगों का एक दूसरे से भरोसा हो गया है। प्रेमी एक दूसरे को परखना चाहते हैं। जहां मात्र पानी की चाहत हो इश्क मुकम्मल कैसे हो सकता है। इश्क हर सूरत में इश्क रहता है चाहे मिले या ना मिले। इश्क त्याग का नाम है। इसे रूह से महसूस किया जाता है।

आजकल की युवा पीढ़ी  'Live- In' रिलेशनशिप को अपना कानूनी अधिकार समझती है वह यह भूल जाती है कि कोई भी कानून आपके दिल में रूहानी इश्क पैदा नहीं कर सकता। वो या तो होता है या नहीं होता।

मैं अपने शब्दों में यही व्यक्त करती हूं कि


जो पहले इश्क़ करते हैं 

फिर परखते हैं।

फिर साथ रहते हैं 

फिर साथ बदलते हैं।।

इश्क़ इश्क़ होता है 

कोई धंधा नहीं होता।

उन्हें या तो इश्क़ नहीं होता 

या फिर इश्क़ अंधा नहीं होता।।

By:- Dr.Anshul 


Ishq Andha Nahi


Comments

Popular Posts

हर घर तिरंगा ( Har Ghar Tiranga)

गृहणी (Grahani)

बेटियाँ (Betiyan)

होली है (Holi Hai)

नारी - एक चिंगारी ( Naari Ek Chingari)

Never Judge a Book by its Cover

सम्मान- रिश्तों का(Samman Rishton Ka)

तानाशाही (Tanashahi)

अभिलाषा: एक बेटी की

फर्क़ - मर्द और औरत का