Ishq Andha Nahi (इश्क अँधा नहीं)
इश्क अँधा नहीं
हमारे देश में प्रेम को अनेकों रूपों में वर्णित किया गया है। कोई इसे इश्क कोई प्यार कोई मोहब्बत कहता है। किसी ने इसे एहसास बताया तो किसी ने रूहानी। कोई इश्क को इबादत कहता था तो कोई खुदा।
इश्क अँधा नहीं
आज के दौर में इसका कुछ अलग ही रूप होता जा रहा है। महज़ आकर्षण इश्क नहीं हो सकता। आज लोगों का एक दूसरे से भरोसा हो गया है। प्रेमी एक दूसरे को परखना चाहते हैं। जहां मात्र पानी की चाहत हो इश्क मुकम्मल कैसे हो सकता है। इश्क हर सूरत में इश्क रहता है चाहे मिले या ना मिले। इश्क त्याग का नाम है। इसे रूह से महसूस किया जाता है।
जो पहले इश्क़ करते हैं
फिर परखते हैं।
फिर साथ रहते हैं
फिर साथ बदलते हैं।।
इश्क़ इश्क़ होता है
कोई धंधा नहीं होता।
उन्हें या तो इश्क़ नहीं होता
या फिर इश्क़ अंधा नहीं होता।।
By:- Dr.Anshul

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