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नारी - एक चिंगारी ( Naari Ek Chingari)

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 एक चिंगारी नारी अभिमान की आवाज़ में कभी रीति में रिवाज़ में भक्ति है जो उस नारी को शक्ति जो उस चिंगारी को जितना भी उसे दबाओगे एक ज्वाला को भड़काओगे। उस अंतर्मन में शोर है बस चुप वो ना कमज़ोर है जितना तुम उसे मिटाओगे उतना मजबूत बनाओगे। बचपन में थामा था आंचल वो ही पूरक वो ही संबल तुम उसके बिना अधूरे हो तुम नारी से ही पूरे हो जितना तुम अहम बढ़ाओगे अपना अस्तित्व मिटाओगे। By- Dr.Anshul Saxena 

हर घर तिरंगा ( Har Ghar Tiranga)

         हर घर तिरंगा 

( Har Ghar Tiranga)

Har ghar tiranga Hindi poem


आजादी का अमृत उत्सव,
देश भक्ति में रंग बिरंगा,
देश प्रेम का तिलक लगा सब,
हर घर में लहराओ तिरंगा।।

आतंक पनपने ना पाए,
घर के भेदी घर को जाएं,
आओ हम ऐसे मिल जाएं,
ना फ़साद ना हो फिर दंगा।
हर घर में लहराओ तिरंगा।।

हर अतिथि का हो अभिनंदन,
हर धर्म का करते हम वंदन,
इस देश की माटी जैसे चंदन,
देश प्रेम पावन ज्यों गंगा।
हर घर में लहराओ तिरंगा।।



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