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नारी - एक चिंगारी ( Naari Ek Chingari)

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 एक चिंगारी नारी अभिमान की आवाज़ में कभी रीति में रिवाज़ में भक्ति है जो उस नारी को शक्ति जो उस चिंगारी को जितना भी उसे दबाओगे एक ज्वाला को भड़काओगे। उस अंतर्मन में शोर है बस चुप वो ना कमज़ोर है जितना तुम उसे मिटाओगे उतना मजबूत बनाओगे। बचपन में थामा था आंचल वो ही पूरक वो ही संबल तुम उसके बिना अधूरे हो तुम नारी से ही पूरे हो जितना तुम अहम बढ़ाओगे अपना अस्तित्व मिटाओगे। By- Dr.Anshul Saxena 

सुनहरा बचपन

                          

                      सुनहरा बचपन 

शायद आप लोगों में से कुछ लोगों का बचपन भी ऐसे ही बीता हो।तो चलिए ताज़ा कर लेते हैं कुछ यादें सुनहरा बचपन की
Sunhara bachpan













बत्ती के जाने पर महफ़िल लगाना
पंखे को झलना गप्पें लड़ाना🌞
बर्फ के गोले की चुस्की और कुल्फी 🍡
लूडो और शतरंज की बाजी लगाना🎲⚄

शाम को छतों पर पानी छिड़काना🚿🌊
रंग बिरंगी पतंगें उड़ाना🔶️🔷️
चोर सिपाही या छुप्पन छुपाई
कभी गुड्डे और गुड़ियों की शादी कराना 🤴👸

दरी पर गद्दे और चादर बिछाना
तारों से तारों में चेहरे बनाना🌟
ठंडा सा तकिया और प्यारी सी नींद🛌
चांदनी रात में मौसम सुहाना🌛

लोगों का लोगों से मिलना मिलाना
अपनों या गैरों से रिश्ते निभाना
बीत गया बचपन ज़ारी है अब भी
उन सुनहरी यादों का ताता लगाना।🙇‍♀️

By: Dr.Anshul Saxena


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