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नारी - एक चिंगारी ( Naari Ek Chingari)

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 एक चिंगारी नारी अभिमान की आवाज़ में कभी रीति में रिवाज़ में भक्ति है जो उस नारी को शक्ति जो उस चिंगारी को जितना भी उसे दबाओगे एक ज्वाला को भड़काओगे। उस अंतर्मन में शोर है बस चुप वो ना कमज़ोर है जितना तुम उसे मिटाओगे उतना मजबूत बनाओगे। बचपन में थामा था आंचल वो ही पूरक वो ही संबल तुम उसके बिना अधूरे हो तुम नारी से ही पूरे हो जितना तुम अहम बढ़ाओगे अपना अस्तित्व मिटाओगे। By- Dr.Anshul Saxena 

नारी शक्ति (Naari Shakti)


Hindi poem(Kavita) Naari Shakti by Dr. Anshul Saxena @expressionshub.co.in


नारी शक्ति

शक्ति भी तू ,

भक्ति भी तू,
तू मान है  महान  है,
प्रेम का सागर है तू ,
तू गुणों की खान है।


स्नेह वात्सल्य वाहिनी,
तू ही है जीवन दायनी,
भाव का भंडार तू,
तेरी जान से जहान है।


कोमल मधुर मधुरिमा,
ब्रह्मांड में तू अग्रिमा,
अर्धांगिनी पुत्री या मां,
तेरे मान में सम्मान है।


अपार शक्ति संचिता,
देवी स्वरूप अंकिता,
सर्वश्रेष्ठ निर्माण तू ,
तू असीमित ज्ञान है।


नारी तुझे प्रणाम है।।
नारी तुझे प्रणाम है।।
Dr.Anshul Saxena



Comments

  1. Bahut sunder rachna.

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  2. Its like you read my mind! You appear to know so much about this, like you wrote the book in it or something.
    I think that you could do with a few pics to drive the message home a little
    bit, but instead of that, this is wonderful
    blog. An excellent read. I'll certainly be back.

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  3. Superb.What a beautiful way to express about nari!

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  4. Very beautiful poem

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  5. Very beautiful poem

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  6. Excellent poem.Terrific expressions

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