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नारी - एक चिंगारी ( Naari Ek Chingari)

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 एक चिंगारी नारी अभिमान की आवाज़ में कभी रीति में रिवाज़ में भक्ति है जो उस नारी को शक्ति जो उस चिंगारी को जितना भी उसे दबाओगे एक ज्वाला को भड़काओगे। उस अंतर्मन में शोर है बस चुप वो ना कमज़ोर है जितना तुम उसे मिटाओगे उतना मजबूत बनाओगे। बचपन में थामा था आंचल वो ही पूरक वो ही संबल तुम उसके बिना अधूरे हो तुम नारी से ही पूरे हो जितना तुम अहम बढ़ाओगे अपना अस्तित्व मिटाओगे। By- Dr.Anshul Saxena 

माँ -बेटी (Maa- Beti)












 इस जहां का दिया हर जुल्म उठा जाऊंगी मैं,
 जब बुलाएगी तू मुझे दौड़कर आऊंगी मैं,
 हर दर्द की आंधी से तुझको बचा लाऊंगी मैं,
 तेरी सुरक्षा के लिए तूफ़ान सह जाऊंगी मैं।


 तेरे सुकून के लिए कई रात जग जाऊंगी मैं,
 आंख बंद हो या खुली बस तुझे पाऊंगी मैं,
 तेरी मुस्कुराहट के लिए हर दर्द सह जाऊंगी मैं,
 उज्जवल भविष्य तुझको मिले और क्या चाहूंगी मैं।।


 छोटी सी तेरी जीत से हर जीत जीत जाऊंगी मैं,
 तेरी बोली तेरे भाव सबको समझाऊंगी मैं,
 आत्मनिर्भर तू बने कुछ ऐसा कर जाऊंगी मैं,
 फिर रहूं या ना रहूं बस धैर्य को पाऊंगी मैं।।

 मंदिर मस्जिद गुरुद्वारे हर जगह जाऊंगी मैं,
 हर सजदे में शीश नवा आशीष दे जाऊंगी मैं
 तेरे जन्म से मुझको नया जन्म मिला है
 इस जन्म को अंत तक तेरे नाम कर जाऊंगी मैं।।
🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏
 By-Dr.Anshul Saxena 













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