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दामाद

दामाद दामाद भी तो एक बेटा ही होता है। इस घर का नहीं तो उस घर का होता है। दामाद भी तो एक बेटा ही होता है।। किसी की अमानत को धरोहर बना, दिल में बिठा के ऐसे संजोता है, कि वह हंसती है तो हंसता है, वह रोती है तो रोता है।। दामाद भी तो एक बेटा ही होता है।। अपने नाम का सिन्दूर मांग में सजा किसी के मान को सम्मान देता है। किसी की बेटी को पत्नी बना, एक अधिकार एक परिवार देता है, दामाद भी तो एक बेटा ही होता है।। आशा की सीपी में वादों के मोती, जीवन की माला में रच के पिरोता है, प्रेम से निष्ठा से कर्तव्य बोध रख सभी के हृदय में स्थान लेता है।। दामाद भी तो एक बेटा ही होता है।। दामाद भी तो एक बेटा ही होता है।। Dr.Anshul Saxena 

समय (Samay)

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     समय (Samay) समय का रोना रोने वालों यदि समय से कर लो काम फिर समय समय ही होगा होगा काम के संग आराम। समय नहीं है कहने वालों ना करो इसे बदनाम समय सभी को मिले बराबर उपयोग तुम्हारा काम। समय का मोल जो समझे  समझो उस के बनते काम जो करता इसकी अनदेखी  उसके बिगड़े बनते काम। समय से सबको दो समय समय पर आओ काम  समय सभी का समय से आता  सबके दाता राम। समय का बनता लेखा-जोखा अच्छे बुरे को सबने देखा सही करो जब सही समय तब समय पर होता नाम। लक्ष्यभेद का लक्ष्य बनाकर हर लक्ष्य को दो अंजाम जीवन भर की भागादौड़ी अंत में मिले विराम।। By Dr.Anshul Saxena

ऐ ज़िंदगी तेरी उम्र बहुत छोटी है

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ऐ ज़िंदगी तेरी उम्र बहुत छोटी है तू कभी हंसती है  तो कभी रोती है ए ज़िंदगी तेरी उम्र बहुत छोटी है। भुला दो सारे शिकवे गिले जो अपने हो उन्हें लगा लो गले जी भर के जी लो आज अभी क्या पता कल मिले ना मिले कल की ना दे ख़बर सपने मग़र बोती है ऐ ज़िंदगी तेरी उम्र बड़ी छोटी है।। किसी से रूठे हो तो उसे मना लो दिल में हो प्यार तो उसे जता दो क्या लिया क्या दिया ये हिसाब छोड़कर जो हो तुम्हारे पास बेहिसाब लुटा दो कर लो अगर क़दर तो आंसू भी मोती है ऐ ज़िंदगी तेरी उम्र बहुत छोटी है।। Dr.Anshul Saxena

खाली हाथ

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चैन ओ सुकूँ को छोड़कर फ़ुर्सत की चाह में, रिश्तों का गला घोंट कर दौलत की राह में, जेबें तिजोरी भर रहे वो जानते नहीं, जाना तो ख़ाली हाथ है उसकी पनाह में।। Dr.Anshul Saxena 

ऐ ज़िंदगी (E Zindgi)

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      E Zindgi ऐ ज़िदगी ऐसे ना सताया कर जिन आंखों में हो सपने वहां थोड़ा ठहर जाया कर छोटा तेरा सफ़र औदा बड़ा मगर तेरी अहमियत जीते जी बताया कर।। मायूसी उदासी दरक़़िनार कर, कभी बेवजह भी मुस्कुराया कर, कभी चेहरे पे चेहरा लगाया कर, एहतियात बरत सौदागरों से, राज़- ए-दिल सब को ना बताया कर।। Dr. Anshul Saxena

जल है तो कल है

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जल है तो कल है नमस्कार पाठकों! आज पूरा देश जल के संकट से जूझ रहा है।ऐसी दशा में मैंने कुछ पंक्तियां जल के संदर्भ में लिखी हैं। जल है तो कल है -इन पंक्तियों के द्वारा मैं लोगों तक यह महत्वपूर्ण संदेश पहुंचाना चाहती हूँ। जल है तो कल है वर्षा की फ़ुहार है जल से, धरती की बहार है जल से, जल जीवन-आधार हमारा, जल बिन सूना ये जग सारा।। एक बूंद चातक को जैसे, प्यासे को जल अमृत वैसे, जल को व्यर्थ ना कभी बहाना, लो संकल्प है इसे बचाना।। Dr.Anshul Saxena 

सुनहरा बचपन

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                                                 सुनहरा बचपन  शायद आप लोगों में से कुछ लोगों का बचपन भी ऐसे ही बीता हो।तो चलिए ताज़ा कर लेते हैं कुछ यादें सुनहरा बचपन की बत्ती के जाने पर महफ़िल लगाना पंखे को झलना गप्पें लड़ाना🌞 बर्फ के गोले की चुस्की और कुल्फी 🍡 लूडो और शतरंज की बाजी लगाना🎲⚄ शाम को छतों पर पानी छिड़काना🚿🌊 रंग बिरंगी पतंगें उड़ाना🔶️🔷️ चोर सिपाही या छुप्पन छुपाई कभी गुड्डे और गुड़ियों की शादी कराना 🤴👸 दरी पर गद्दे और चादर बिछाना तारों से तारों में चेहरे बनाना🌟 ठंडा सा तकिया और प्यारी सी नींद🛌 चांदनी रात में मौसम सुहाना🌛 लोगों का लोगों से मिलना मिलाना अपनों या गैरों से रिश्ते निभाना बीत गया बचपन ज़ारी है अब भी उन सुनहरी यादों का ताता लगाना।🙇‍♀️ By: Dr.Anshul Saxena