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नारी - एक चिंगारी ( Naari Ek Chingari)

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 एक चिंगारी नारी अभिमान की आवाज़ में कभी रीति में रिवाज़ में भक्ति है जो उस नारी को शक्ति जो उस चिंगारी को जितना भी उसे दबाओगे एक ज्वाला को भड़काओगे। उस अंतर्मन में शोर है बस चुप वो ना कमज़ोर है जितना तुम उसे मिटाओगे उतना मजबूत बनाओगे। बचपन में थामा था आंचल वो ही पूरक वो ही संबल तुम उसके बिना अधूरे हो तुम नारी से ही पूरे हो जितना तुम अहम बढ़ाओगे अपना अस्तित्व मिटाओगे। By- Dr.Anshul Saxena 

समय (Samay)

     समय (Samay)

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समय का रोना रोने वालों
यदि समय से कर लो काम
फिर समय समय ही होगा
होगा काम के संग आराम।


समय नहीं है कहने वालों
ना करो इसे बदनाम
समय सभी को मिले बराबर
उपयोग तुम्हारा काम।


समय का मोल जो समझे 
समझो उस के बनते काम
जो करता इसकी अनदेखी 
उसके बिगड़े बनते काम।

समय से सबको दो समय
समय पर आओ काम 
समय सभी का समय से आता 
सबके दाता राम।


समय का बनता लेखा-जोखा
अच्छे बुरे को सबने देखा
सही करो जब सही समय तब
समय पर होता नाम।


लक्ष्यभेद का लक्ष्य बनाकर
हर लक्ष्य को दो अंजाम
जीवन भर की भागादौड़ी
अंत में मिले विराम।।

By Dr.Anshul Saxena

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