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उम्र के उस पार (Umra ke us paar)

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          उम्र के उस पार  बूढ़े या जवान? मनुष्य का जीवन उसकी आयु, शारीरिक विकास और क्षमता के अनुसार मुख्य रूप से चार अवस्थाओं में विभाजित किया गया है बाल्यावस्था, किशोरावस्था, युवावस्था और वृद्धावस्था। हर आयु की अपनी एक विशेषता होती है। बाल्यावस्था मासूम और चंचल होती है तो किशोरावस्था उत्सुकता और परिवर्तन लेकर आती है। युवावस्था असीम शक्ति और उत्तेजना का सूचक होती है तो वृद्धावस्था अनुभव और ज्ञान से परिपूर्ण होती है। शारीरिक क्षमता और कार्य क्षमता भले ही आयु के साथ घटती जाती है परंतु सीखने की क्षमता, इच्छाशक्ति, दृढ़ संकल्प और आत्म शक्ति समान रूप से सभी अवस्था में मनुष्य के अंदर होना या विकसित करना संभव है। युवावस्था पार कर चुके कई लोगों का ऐसा कहना कि "अब हमारी उम्र हो चली है... अब हमसे कुछ नहीं हो पाएगा या अब कुछ नया सीखना संभव नहीं" कहीं ना कहीं निराशावादी सोच का सूचक बन जाता है। वे लोग कहीं ना कहीं अपने अनेकों अनुभवों से संभव होने वाली उपलब्धियों पर पूर्ण विराम लगा देते हैं। वे लोग अपनी उम्र को बड़ा कारण बता कर समाज का उदाहरण लेते हुए समस्त क्रि...

उम्र और सोच- एक कहानी (Umra Aur Soch- Ek Kahani)

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उम्र और सोच- एक कहानी   सुबह-सुबह चाय की चुस्कियों के साथ दो पुराने दोस्त अपनी पुरानी यादों को ताजा करते हुए आपस में बातचीत कर रहे थे। "वो भी क्या दिन थे शर्मा लगता है कल की ही बात थी जब मैंने ऑफिस ज्वाइन किया था और फिर पलट के वापस नहीं देखा। और आज देखो रिटायर भी हो गए। मानो वक्त गति के पंख लगाकर उड़ता ही चला गया। आज अपने बेटे विकास को देखता हूं तो अपनी छवि नज़र आती है, उसके काम करने के अंदाज में.. अब तो बस आराम करना है। मैं,तुम, खुराना और अपने कुछ दोस्त एक दूसरे के साथ अपना वक्त बिताया करेंगे क्यों सही कहा ना?" शर्मा जी:  "एकदम सही कहा वर्मा जी हा हा हा हा.." "पुराने दोस्तों से याद आया यार शर्मा अपने रमेश और किशोर कहां होंगे कैसे दिखते होंगे? अरसा हो गया उन को देखे हुए। है ना?" वर्मा जी ने उत्सुकतापूर्वक पूछा। तभी वर्मा जी का बेटा विकास अपना फोन लेने ड्राइंग रूम में आया और बोला, "पापा मैंने कब से आपका Facebook पर अकाउंट बनाया हुआ है आप चेक ही नहीं करते।" वर्मा जी: "अरे बेटा अब ये social media वगैरह सीखने की उम्र थोड़े ना रह गय...

सच्चा गुरु (Sachcha Guru)

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गुरु वही जो सीख सिखा दे, जीने की तरकीब बता दे, जीवन पथ के अंधियारों में,  आशाओं की ज्योत जला दे।। लक्ष्य भेदकर नभ छूने सा, शंखनाद मन में करवा दे, भूले भटके अनजानों को, सही मार्ग को जो दिखला दे।। गुरु वही जो सीख सिखा दे... ज्ञान जो बाँटे बहुत मिलेंगे, गुरु कहो जिसे बहुत मिलेंगे, दृढ़ संकल्प की नवलय का नवगीत तुम्हारे ह्रदय जगा दे, पुस्तक ज्ञान से ऊपर उठ, जो जीने का उद्देश्य बता दे, कर नमन उन गुरुओं को, आदर से यह शीश नवा दे।। शिक्षा का व्यापार करे जो, स्वार्थ हेतु आघात करे जो, आशाओं और अभिलाषाओं का, निर्मम तुषारापात करे जो; कोमलता को रौंद रौंदकर, शिक्षक भक्षक बन कर जब, मर्यादा का अर्थ भुलाकर,  आदर्शों को जो झुठला दे; ऐसे ढोंगी गुरुओं को सतगुरु सत का पाठ पढ़ा दे🙏 उन अंतर्मन के रावण पर  राम नाम की विजय करा दे।।🙏 By-Dr.Anshul Saxena  इस कविता को एक बार सुनिए जरूर-

विवाह- मेहमान और उपहार

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 शुभ विवाह संपन्न,🙏  फिर सब शुरू हो जाते हैं,  जो जाते हैं जो बुलाते हैं,   सबकी शिकायतों के  बस्ते खुल जाते हैं।।🤗  लोग क्या लाते हैं,  क्या दे जाते हैं,  आइए ऐसी टीका- टिप्पणियों का,  मिलकर लुत्फ़ उठाते हैं।।🤓 एक को बुलाओ तो, चार चार आते हैं,😏 हज़ारों लेते हैं, सौ पाँच सौ दे जाते हैं।।🙄 कुछ नकली हार भी,  सोने का बताते हैं,😎 बहुत क़ीमती है, ऐसा दिखाते हैं।😂 कुछ लोग तो पता नहीं, क्या-क्या दे जाते हैं,  अपने अन उपयोगी उपहारों को,  बड़ी शान से थमाते हैं।🙌 कुछ शादी की खुशी इस तरह मनाते हैं, एक दो नहीं आठ दस टिकाते हैं,🍻 फिर क्या देना है कुछ याद नहीं रहता, अंत में खाली लिफ़ाफ़ा ही दे आते हैं।।😂 कुछ खाने में क्या है,  ऐसी जानकारी जुटाते हैं,🍖🍔🍜🍛 ऐसे अवसर कहां बार-बार आते हैं,🍕🌭🌮🌯🍨 इसलिए एक एक चीज़ जी भर के खाते हैं।। कुछ लोग तो, पूरी थाली भर लाते हैं,🍱 फिर मिले ना मिले, इस तरह चबाते हैं।।😆 जो आते हैं उन सब से, मिल भी नहीं पाते हैं,🤔 फिर भी जो नहीं आते ...

शॉपिंग बालाएं

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  डिस्काउंट आने पर जो झूम जाती हैं,🙌 डिस्काउंट के गणित में वो घूम जाती हैं,🤔😇 एक चीज लेनी हो दस चीज लाती हैं,🤗 कभी दस में भी कुछ लिए बिना लौट आती हैं,😣 शॉपिंग इनकी जन्नत मॉल इनका स्वर्ग😃 महिलाएं या बालाएं कहां समझ आती हैं।🙅 एक ड्रेस जब दो जगह पहन जाती हैं,👗 अगली जगह उसी ड्रेस को पुराना बताती हैं, अपने जैसी ड्रेस कहीं देख आती हैं,  तो महंगी से महंगी ड्रेस ना इन्हें भाती हैं, आधे कपड़े भी ठीक से पहन नहीं पाती हैं,  फिर भी भरी अलमारी खाली बताती हैं।।🙆 कभी कहीं कभी कहीं अक्सर ये जाती हैं,  फिर भी कहां जाऊं यह सवाल उठाती हैं,🤔 आपकी हां या ना में बस इतना फर्क़ है, हां की तो जेब कटी ना में बेडा ग़र्क है, हर तर्क अंत में यह जीत जाती हैं,👧 पिता हो या पति उन्हें मना ही लाती हैं।। By:- Dr.Anshul Saxena 

शादी का कार्ड

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शादी का कार्ड इतना बलवान, आपसे ज्यादा इसका मान, जब यह मिले तभी सम्मान, ना मिले तो भ्रकुटी कमान।।😤  प्रथम निमंत्रण आपको,  पूरे करिए काम,🙏  फिर भी मेरी मानिए,  सब इतना नहीं आसान।।  कुछ मान्य लोग हैं,😎  सम्मान होना चाहिए😀  ये आएं या ना आएं,  कार्ड होना चाहिए,  घर में भीगी बिल्ली   शादी में बनें महान।।  शादी का कार्ड...... रीति रिवाज तमाम होने चाहिए, सगे-संबंधियों का नाम होना चाहिए, सपरिवार लिखना भूल गए, फिर देखें इसका परिणाम, शीत युद्ध का हो जाता ऐलान।।😲 शादी का कार्ड....... यह जिसको नहीं मिला  उस की घटती शान, मनमुटाव को मन में ठान, शिकायतों की खुले दुकान, हे भगवान हे भगवान !!🤔 मान ना मान ऐसे मेहमान।। शादी का कार्ड......🙏 By-Dr.Anshul Saxena

तस्वीरें- नयी पुरानी ( Tasveeren Nayi Purani)

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                           पहले की तस्वीरों में एक याद हुआ करती थी, दिल-अज़ीज़ लम्हों की कुछ बात हुआ करती थी, कुछ यादों के बक्सों जैसी बार-बार खुलती थी, कुछ किताब में छिपी हुई एक राज़ हुआ करती थी।। कुछ इकट्ठे एक जगह अलमारी में रहती थी, जब खुलती थी बिन बोले ही बोल उठा करती थी, हम खुद को कम और औरों को उनमें ढूंढा करते थे, धुंधली हो या धूमिल सी, बेमोल हुआ करती थी।। मानो जैसे कोई खजाना संजो संजो कर रहती थी, बार-बार तो मुश्किल थी सोच-समझकर खिंचती थी, कुछ खुशियों की लहरों जैसी दिल छुआ करती थी, कुछ बन जाती कोई कहानी कुछ खास हुआ करती थी।। अब तो हर घंटों में तस्वीर खिंचा करती हैं, यादें हों या ना हों पर तस्वीर हुआ करती हैं, एक पोज़ के ढ़ेरों पोज़ सेल्फी में मिलते हैं, मेमोरी फुल होने पर डिलीट हुआ करती हैं।। जल्दी-जल्दी क्लिक होते ही शेयर हुआ करती है डीपी और  प्रोफाइल में बार-बार ये डलती है नया ज़माना नई तस्वीर वक़्त के साथ ही ढ़लती है पल में अच्छी लगती है पल पल में बदलती है।। By-Dr.Anshul Saxen...