Khwaish ( ख्वाहिश) ये उम्र ढल रही है एक शाम की तरह,मिट ना जाये रेत पर एक नाम की तरह,ख्वाइशों का परिंदा कुछ ऐसे उड़ रहा, लत हो जैसे जीने की एक जाम की तरह।। Dr. Anshul Saxena Get link Facebook X Pinterest Email Other Apps Comments Abhinav Saxena said… बहुत अच्छी, दिल के बहुत करीब लगी आपकी पक्तियां🙏 Dr.Anshul Saxena said… बहुत-बहुत धन्यवाद और आभार😊
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बहुत अच्छी, दिल के बहुत करीब लगी आपकी पक्तियां🙏