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नारी - एक चिंगारी ( Naari Ek Chingari)

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 एक चिंगारी नारी अभिमान की आवाज़ में कभी रीति में रिवाज़ में भक्ति है जो उस नारी को शक्ति जो उस चिंगारी को जितना भी उसे दबाओगे एक ज्वाला को भड़काओगे। उस अंतर्मन में शोर है बस चुप वो ना कमज़ोर है जितना तुम उसे मिटाओगे उतना मजबूत बनाओगे। बचपन में थामा था आंचल वो ही पूरक वो ही संबल तुम उसके बिना अधूरे हो तुम नारी से ही पूरे हो जितना तुम अहम बढ़ाओगे अपना अस्तित्व मिटाओगे। By- Dr.Anshul Saxena 

तालिबानी सोच (Talibani Soch)

 

     तालिबानी सोच

 नमस्कार!

इस दुनिया में हो रहे तालिबानी खेल को तो हम सभी देख रहे हैं लेकिन आश्चर्य और अफसोस उन लोगों के लिए होता है जो कहने को तो हिंदुस्तानी है मगर सोच से तालिबानी है।
मेरी पूरी कविता "तालिबानी सोच"को सुनने के लिए नीचे दिए गए वीडियो को जरूर देखें। जय हिंद जय भारत🙏

 

Talibani Soch @expressionshub.co.in

लानत है उन गद्दारों पे,
जो प्यार करें हथियारों से,
जो पीठ में चाकू घोंपते हैं,
बदतर हैं वो हत्यारों से।।

कहते इस देश में डरते हैं,
आज़ादी-आज़ादी करते हैं,
असली आज़ादी का मतलब,
ज़रा पूछो उन अफ़गानों से।।

मुमकिन है जान बचा लें वो,
आतंकी खूनी मंजर से,
कैसे यह मुल्क़ बचाओगे?
कुछ उन झूठे मक्कारों से।।

जो कहने को हिंदुस्तानी हैं,
पर सोच से तालिबानी हैं,
हल ढूंढो कल ग़र बचना है
इनके आतंकी वारों से।।

           Dr.Anshul Saxena 



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