Posts

भाषा और बेटी (Bhasha Aur Beti)

Image
  जिस देश में जन्मी बड़ी हुई, कोने में छुप के खड़ी हुई, स्थान तलाशे वो अपना, कागज़ में सिमटी पड़ी हुई।। अपनों की पीढ़ी ठगती गई, ग़ैरों की भाषा बढ़ती गई, शिक्षा के जगत में पिछड़ गई, अपनों से जैसे बिछड़ गई।। तुम ठुकराओगे तो कौन अपनाएगा? लगातार तिरस्कार कब रुक पाएगा? भाषा और बेटी गर्व हैं सम्मान हैं, देश का ये गौरव देश का ये मान हैं, सत्य चुभेगा कड़वा लगेगा, अपने ही घर में ये पराई समान हैं।। Dr.Anshul Saxena 

एक सार/ Ek saar

Image
  जीवन का एक सार लिए, कुछ बातों का भार लिए, हम कड़वाहट को पीते हैं, और हंस के जीवन जीते हैं।। कुछ लोग यह जान नहीं पाते, क्या होते हैं रिश्ते नाते, बेवजह की गुत्थमगुत्थी में, वो हारे हैं या जीते हैं।। क्या लाये क्या ले जाओगे, जो बाँटोगे वो पाओगे, कभी-कभी दिल को चुप कर, हम होठों को सीते हैं।। और हंस के जीवन जीते हैं।। Dr. Anshul Saxena 

Khwaish ( ख्वाहिश)

Image
  ये उम्र ढल रही है एक शाम की तरह, मिट ना जाये रेत पर एक नाम की तरह, ख्वाइशों का परिंदा कुछ ऐसे उड़ रहा,  लत हो जैसे जीने की एक जाम की तरह।। Dr. Anshul Saxena 

माँ-बाप (Maa-Baap)

Image
              माँ-बाप माँ-बाप जिन्हें चलना बोलना सिखाते हैं, क्यों बड़े हो बच्चे उन से ही बड़े हो जाते हैं? जो निःस्वार्थ त्याग कर इनका जीवन बनाते हैं  क्यों उन की परवरिश पर बच्चे सवाल उठाते हैं? जब हम गिर जाते थे,  यही हमें उठाते थे। जब हम रुक जाते थे, यही हमें बढ़ाते थे। बच्चों का यह कहना दिल छलनी कर जाता है, अरे, आपको उठना बैठना भी नहीं आता है। जो बच्चों पे अपना जीवन लुटाते हैं लेते नहीं कुछ बस दुआएं दे जाते हैं उनकी सेवा से बच्चे क्यों हिचकिचाते हैं? उनके जीवन कैसे निजी हो जाते हैं? वो कभी नहीं थके, ताकि हम हँस सकें। वो कभी नहीं रुके, ताकि हम बढ़ सकें। उनका दिल बार-बार तार-तार हो जाता है, जब बच्चे कहें आपको इतना भी नहीं आता है। माँ-बाप का किया तो फ़र्ज बताते हैं, जो खुद करें उसे बार-बार जताते हैं। सब कुछ लुटा के जो बच्चों को बनाते हैं, क्यों वो ही दर-दर की ठोकरें खाते हैं? संभल जाओ लाडलों वक़्त है अभी, एक बार जो गए फिर ना आएंगे कभी, तब तुम समझोगे जुदाई क्या है? पूछते हो आपने किया ही क्या है? माँ-बाप  क...

तानाशाही (Tanashahi)

Image
  नौकर ये सरकार के या नौकरी सरकारी। गैर कानूनी काम करें कानून के अधिकारी। सरेआम धमकियां देते हैं बन बैठे तानाशाही। न्याय मांगने वालों पर अन्याय हो रहा भारी।।

खुदगर्ज़ (Khudgarz)

Image
   Khudgarz कर सोच समझकर हाल-ए-दिल बयां, सौदा करेगा फ़िर तेरे दर्द का जहाँ, पीठ चढ़ तेरी जो कद तेरा पूछें, उम्मीद क्या उनसे खुदग़र्ज़ हों जहां।।

दीवाने (Deewane)

Image
दीवाने (Deewane) कुछ दीवानों को क्यों यकीं नहीं होता, कहते हैं अब कोई इतना हंसी नहीं होता। जुल्फों में जिसकी सावन की घटा हो, लंबा सा पल्लू काँधे से सटा हो, जो उठा दे निगाहें तो दिल धड़क जाए, छूले ज़रा सा तो शोले दहक जाएं, पहले जो होता था क्यों अब नहीं होता? इन आशिक़ दीवानों को कोई तो समझाए, आते जाते नारी से ये नजरें हटाएं।। नज़ाकत भी है शोखी भी है जैसे कोई ग़ज़ल, कुछ नज़र का फ़ेर है कुछ समय गया बदल, समय बदल गया नारी गई बदल तुम भी बदल जाओ और जाओ अब संभल, दिल को संभालो ज़रा ना जाए ये फ़िसल मिल जाएगा सबक अगर तुम गए मचल। हां, अब तक जो होता आया वह अब नहीं होता। पर ऐसा नहीं कि अब कोई हंसी नहीं होता।।