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नारी - एक चिंगारी ( Naari Ek Chingari)

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 एक चिंगारी नारी अभिमान की आवाज़ में कभी रीति में रिवाज़ में भक्ति है जो उस नारी को शक्ति जो उस चिंगारी को जितना भी उसे दबाओगे एक ज्वाला को भड़काओगे। उस अंतर्मन में शोर है बस चुप वो ना कमज़ोर है जितना तुम उसे मिटाओगे उतना मजबूत बनाओगे। बचपन में थामा था आंचल वो ही पूरक वो ही संबल तुम उसके बिना अधूरे हो तुम नारी से ही पूरे हो जितना तुम अहम बढ़ाओगे अपना अस्तित्व मिटाओगे। By- Dr.Anshul Saxena 

क़त्ल (Katl)

 क़त्ल (Katl)

बाहर शोर और मेला है,
अंदर मन मौन अकेला है,
जब अंदर यह घबराता है,
एक खंजर खून बहाता है।


रोक लो खून को बहने से,
अपनों को घायल होने से,
अनजाने में अपनों का कोई,
अपना कातिल बन जाता है।।


कोई भरा हुआ है भावों से,
बस भावुक सा हो जाता है,
तुम ना समझे तो क्या होगा,
यह सोच के वो कतराता है।।

थोड़ा हंस लो थोड़ा सह लो,
कुछ वो कह दे कुछ तुम कह लो,
किसका क्या चला जाता है,
ग़र इक जीवन बच जाता है।।


Hindi poem katl about Sushant Singh Rajput


Comments

  1. बहुत अच्छे। इस माहौल में यह कविता बिलकुल हमारी स्थिति को दर्शाती है

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  2. बेहतरीन कविता क्या बात है...

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