सकारात्मकता और नकारात्मकता - एक अंतर्द्वंद् (A Conflict)

 

सकारात्मकता और नकारात्मकता - अंतर्द्वंद् (A Conflict)

प्रत्येक व्यक्ति के मस्तिष्क में प्रतिदिन एक द्वंद सा रहता है। अक्सर यह द्वंद सकारात्मकता और नकारात्मकता के मध्य होता है। 

यह सकारात्मकता और नकारात्मकता परस्पर जल और अग्नि के समान होते हैं। जल जो शीतलता देता है अग्नि जो यदि दहक जाए तो सब दहन कर देती है।


इस द्वंद में यदि जल की मात्रा अधिक हो तो वह अग्नि को बुझा देता है पर यदि अग्नि की मात्रा अधिक हो तो वह जल को सुखा देती है।


क्या आप जानते हैं कि आपके अंदर होने वाले इस सकारात्मकता और नकारात्मकता के द्वंद में कौन विजयी होता है।
इस द्वंद में वही विजयी होता है जिसकी मात्रा को आप बढ़ावा देते हैं।


दोस्तों अपने अंदर की नकारात्मकता की अग्नि को इतना मत बढ़ने दीजिए कि वह आपके अंदर की जल रुपी सकारात्मकता को भी सुखा दे और सब दहन कर दे।
स्वयं भी सकारात्मक रहिये और औरों को सकारात्मकता की शीतलता प्रदान कीजिए।


Be positive and let the positivity win inside you.

सकारात्मकता और नकारात्मकता - अंतर्द्वंद् (A Conflict)



Comments

Popular Posts

हर घर तिरंगा ( Har Ghar Tiranga)

गृहणी (Grahani)

बेटियाँ (Betiyan)

होली है (Holi Hai)

नारी - एक चिंगारी ( Naari Ek Chingari)

तानाशाही (Tanashahi)

सम्मान- रिश्तों का(Samman Rishton Ka)

अभिलाषा: एक बेटी की

सलीक़ा और तरीक़ा (Saleeka aur Tareeka)

Hindi Kavita Saath (हिंदी कविता साथ)