Featured Post

नारी - एक चिंगारी ( Naari Ek Chingari)

Image
 एक चिंगारी नारी अभिमान की आवाज़ में कभी रीति में रिवाज़ में भक्ति है जो उस नारी को शक्ति जो उस चिंगारी को जितना भी उसे दबाओगे एक ज्वाला को भड़काओगे। उस अंतर्मन में शोर है बस चुप वो ना कमज़ोर है जितना तुम उसे मिटाओगे उतना मजबूत बनाओगे। बचपन में थामा था आंचल वो ही पूरक वो ही संबल तुम उसके बिना अधूरे हो तुम नारी से ही पूरे हो जितना तुम अहम बढ़ाओगे अपना अस्तित्व मिटाओगे। By- Dr.Anshul Saxena 

Ishq (इश्क़ )

 

            इश्क़

प्रेम के भी अनगिनत रूप हैं। किसी को होता नहीं है और किसी का जाता नहीं है। कोई प्यार में मर कर भी जी जाता है और युगों युगों तक ताजमहल जैसी निशानियां छोड़ जाता है और कोई जीते जी भी मर जाता है। लेकिन अगर कुछ रह जाता है तो वह है प्रेम। 

मैंने भी इस प्रेम को अपनी कल्पना में उभारा है। शब्दों से इसके चित्र को बनाया है मिटाया है प्रस्तुत है कुछ और झलकियां।

सुना है तनहाई में मुझे याद करते हो,
कलियों और बागवाँ से मेरी बात करते हो,
खोकर भी तुमने कुछ नहीं हारा है,
मुकम्मल ना सही पर इश्क़ तो तुम्हारा है।।




तुम्हें पाकर भी तुम्हें ना खोती,
तुम्हारी ना होकर भी तुम्हारी ना होती,
अगर इश्क़ की कोई उम्र ना होती,
तो तेरे नाम की धड़कन ता उम्र ना होती।।




Comments

Popular posts from this blog

गृहणी (Grahani)

अभिलाषा: एक बेटी की

नारी - एक चिंगारी ( Naari Ek Chingari)

सुनहरा बचपन

उम्र और सोच- एक कहानी (Umra Aur Soch- Ek Kahani)

तानाशाही (Tanashahi)

आजकल हर शख़्स व्यस्त है?

सुकून (Sukoon)

सलीक़ा और तरीक़ा (Saleeka aur Tareeka)

बेटियाँ (Betiyan)