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नारी - एक चिंगारी ( Naari Ek Chingari)

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 एक चिंगारी नारी अभिमान की आवाज़ में कभी रीति में रिवाज़ में भक्ति है जो उस नारी को शक्ति जो उस चिंगारी को जितना भी उसे दबाओगे एक ज्वाला को भड़काओगे। उस अंतर्मन में शोर है बस चुप वो ना कमज़ोर है जितना तुम उसे मिटाओगे उतना मजबूत बनाओगे। बचपन में थामा था आंचल वो ही पूरक वो ही संबल तुम उसके बिना अधूरे हो तुम नारी से ही पूरे हो जितना तुम अहम बढ़ाओगे अपना अस्तित्व मिटाओगे। By- Dr.Anshul Saxena 

About Author


Hi friends!
I am Dr. Anshul Saxena who is a typical literary person. I am a keen observer...have a passion for writing since my childhood. I love to express my feelings, my views and my thoughts on paper in the form of poems,stories, articles or quotes. My passion for writing gave birth to an author in me. By the grace of God, I could write and publish a few books also.
I believe "Learning never Ends", I am still learning and trying to spread my views and knowledge through my blog posts.
My motive is just to connect with my readers..to convey my expressions in the form of my blog.

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