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नारी - एक चिंगारी ( Naari Ek Chingari)

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 एक चिंगारी नारी अभिमान की आवाज़ में कभी रीति में रिवाज़ में भक्ति है जो उस नारी को शक्ति जो उस चिंगारी को जितना भी उसे दबाओगे एक ज्वाला को भड़काओगे। उस अंतर्मन में शोर है बस चुप वो ना कमज़ोर है जितना तुम उसे मिटाओगे उतना मजबूत बनाओगे। बचपन में थामा था आंचल वो ही पूरक वो ही संबल तुम उसके बिना अधूरे हो तुम नारी से ही पूरे हो जितना तुम अहम बढ़ाओगे अपना अस्तित्व मिटाओगे। By- Dr.Anshul Saxena 

माँ (Maa)

माँ

Hindi poem about mother @expressionshub



पापड़ चिप्स बड़ी अचार,
मां के हाथ में स्वाद हजार,
दुनिया का कोई बाजार,
बेच ना पाए मां का प्यार।

वो सिर पर हथेली,
वो पूजा की थाली,
मां की दुआएं,
जाती न खाली।

ममता की महिमा
तो गीता का सार
पावन है जैसे हो
गंगा की धार।।

घर में हो मां
तो गले से लगाना
उसके हृदय को
कभी ना दुखाना।

किस्मत से मिलता है
मां का दुलार
सिर माथे रखना
दे खुशियां अपार।

चाहे जितना कमा लो
लगा लो भंडार
ममता का ऋण रहे
सब पर उधार।।

जीवन में मां,
ना मिलेंगी हजार।
मां का ही मोल,
सब दौलत बेकार।

डाॅ. अंशुल सक्सेना 

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