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मर्यादा के उस पर जाना नहीं (Maryada)

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       मर्यादा के उस पर जाना नहीं आज मैं अपनी कविता के माध्यम से अपने देश की तमाम बेटियों बच्चियों और बहनों को एक संदेश देना चाहती हूं।  प्रेम एक बहुत ही सुंदर भाव है और आदिकाल से प्रेम का अनेक रूपों में वर्णन किया गया है। प्रेम का अर्थ पाना, मारना या मिटाना नहीं बल्कि प्रेम का अर्थ है त्याग। प्रेम का सही अर्थ समझना है तो राधा कृष्ण के प्रेम से अधिक सुंदर कोई और उदाहरण नहीं हो सकता। आधुनिक पीढ़ी प्रेम की भावना को ठीक से समझती नहीं और महज एक आकर्षण को प्रेम समझ बैठी है और कुछ लोग क्षणिक भाव में किसी भी हद तक मर्यादा को तोड़ने में आतुर हो जाते हैं।  यह सब आज बहुत आगे बढ़ चुका है लेकिन आज भी प्रेम में जब भी मर्यादा लांघी जाती है तो समाज बेटियों बच्चियों पर आरोप लगाने से पीछे नहीं हटता। ऐसे में बच्चियों के माता-पिता या स्वयं बच्चियों का एक कर्तव्य बनता है कि वह प्रेम भाव में अपनी मर्यादा को ना तोड़ें।  तो अब मैं कविता के माध्यम से अपना संदेश प्रस्तुत करना चाहती हूं। आशा है मेरा संदेश देश की बछिया बेटियों, बच्चियों  और उनके माता-पिता तक अवश्य पहुंचेगा।...

रघुवर हनुमान जी (Raghuvar Hanuman ji)

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 रघुवर हनुमान जी "श्रीगुरु चरन सरोज रज निज मन मुकुरु सुधारि। वरनउं रघुबर बिमल जसु जो दायकु फल चारि॥ तुलसीदास जी हनुमान चालीसा लिखते थे लिखे पत्रों को रात में संभाल कर रख देते थे सुबह उठकर देखते तो उन में लिखा हुआ कोई मिटा जाता था। तुलसीदास जी ने हनुमान जी की आराधना की , हनुमान जी प्रकट हुए तुलसीदास ने बताया कि मैं हनुमान चालीसा लिखता हूं तो रात में कोई मिटा जाता है हनुमान जी बोले वह तो मैं ही मिटा जाता हूं। हनुमान जी ने कहा अगर प्रशंसा ही लिखनी है तो मेरे प्रभु श्री राम की लिखो , मेरी नहीं तुलसीदास जी को उस समय अयोध्याकांड का प्रथम दोहा सोच में आया उसे उन्होंने हनुमान चालीसा के प्रारंभ में लिख दिया " श्रीगुरु चरन सरोज रज निज मन मुकुरु सुधारि। वरनउं रघुबर बिमल जसु जो दायकु फल चारि॥ तो हनुमान जी बोले मैं तो रघुवर नहीं हूं तुलसीदास जी ने कहा आप और प्रभु श्री राम तो एक ही प्रसाद ग्रहण करने के उपरांत अवतरित हुए हैं इसलिए आप भी रघुवर ही है। तुलसीदास ने याद दिलाया कि ब्रह्म लोक में सुवर्चला नाम की एक अप्सरा रहती थी जो एक बार ब्रह्मा जी पर मोहित हो गई थी जिससे क्रुद्ध होकर ब्रह्माजी ...

Patte - Dosti ke (पत्ते- दोस्ती के)

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 पत्ते- दोस्ती के  आज की कुछ पंक्तियां दोस्तों और दोस्ती के नाम है। जिंदगी का एक ऐसा पड़ाव होता है जिसमें दोस्त हमारे लिए बहुत मायने रखते हैं और उस समय हमारे लिए दोस्त एक अहम भूमिका निभाते हैं। फिर धीरे-धीरे जब वक्त बीतता है और जिंदगी अपनी जिम्मेदारियां का ताना-बाना बुनती है तो यही दोस्त कहीं पीछे रह जाते हैं। कुछ जुड़े रहते हैं तो कुछ छूट जाते हैं। तो बस इसी भाव को लेकर प्रस्तुत है आज की कुछ पंक्तियां☺️🫶🤗🙏💐

kitaab Chehron Ki (किताब चेहरों की)

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जिंदगी की जंग में कोई साथ नहीं देता, गलती से डूब जाओ तो कोई हाथ नहीं देता, कोशिश करो हज़ार फिर भी मिलेगी हार, चेहरों को पढ़ने वाली कोई किताब नहीं देता।।

फर्क़ - मर्द और औरत का

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  फर्क़ मर्द और औरत का  आधुनिक युग में बहुत से लोग कहते हैं कि एक मर्द और औरत में कोई फर्क नहीं होता और वह तो कंधे से कंधा मिलाकर चल रहे हैं। क्या वास्तव में ऐसा संभव हो सका है? बहुत से क्षेत्र में नारी ने पुरुष के साथ कन्धे से कंधा मिलाया है लेकिन यथार्थ के धरातल पर या यूँ कहें वास्तविक जीवन में बहुत सी ऐसी नारियां है जो जीवन में बहुत कुछ करना चाहती हैं लेकिन कभी परिस्थितियों वश, कभी कर्तव्यनिष्ठा या कभी अपनी जिम्मेदारियां की वजह से वे वह नहीं कर पाती जो वे कर सकती हैं। अपना नाम, पहचान, घर-परिवार सब को छोड़ने के बाद भी अंतत: कई बार नारी को अपने सपने भी अपनों के लिए छोड़ने पड़ जाते हैं।  तो बस इसी संदर्भ में यहां मैंने कुछ अभिव्यक्त करने का प्रयास किया है। बचपन में सपनों को उड़ान मिलती है  अपनों से अपनेपन की मुस्कान मिलती है यहाँ दूसरे घर की वहाँ पराई रहती है  छिन जाता है वो नाम जो पहचान मिलती है बड़े होते-होते उसके पंख कट जाते हैं।  कभी गृहस्थी तो कभी जिम्मेदारी में बँट जाते हैं  उसे तो अपनी जिंदगी जीने का भी हक नहीं है  और कहते हो कि मर्द और औरत...

Never Judge a Book by its Cover

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  Never Judge a Book by its Cover  एक बार एक 24 साल का लड़का ट्रेन में अपने पिता के साथ यात्रा कर रहा था। वह बहुत ही उत्तेजित और उत्साहित था। इस ट्रेन में उनके साथ एक दंपति बैठा हुआ था। वह लड़का बार-बार खिड़की से बाहर देखकर अत्यंत खुश हो रहा था। अचानक से वह लड़का जोर-जोर से ताली बजाकर उत्साहित होता हुआ बोल पापा देखिए पेड़ पीछे जाते जा रहे हैं और हम आगे जा रहे हैं। उसके पिता मुस्कुरा दिए लेकिन साथ बैठे दंपति को बहुत ही आश्चर्य हुआ। कितना बड़ा लड़का किस तरह से बच्चों की तरह व्यवहार कर रहा है?  लेकिन वह दंपति चुपचाप बैठा उस लड़के को देखता रहा। थोड़ी देर बाद ही वह लड़का फिर से उत्साहित होकर अपने पिता से बोा पापा देखिए बादल हमारे साथ-साथ चल रहे हैं। अब इस बार उसे दंपति से रहा नहीं गया और उन्होंने उसे लड़के के पिता से कहा की आप अपने बेटे को किसी डॉक्टर को क्यों नहीं दिखाया। इतनी बड़ी उम्र में भी यह कैसी बच्चों जैसी हरकतें कर रहा है और आप सिर्फ मुस्कुरा रहे हैं। इस पर उसे लड़के के पिता ने उसे दंपति से कहा कि हम अभी डॉक्टर क्या से ही आ रहे हैं। आपसे कुछ दिनों पहले तक यह लड़का ब्ल...

Hindi Kavita Saath (हिंदी कविता साथ)

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साथ  कठिनाइयां भी हों सरल हार हो जाए विफल मझधार में कश्ती खड़ी आगे भी जाएगी निकल तुम हाथ तो दो।। बीत जाएंगे ये पल फिर नहीं मिलेंगे कल हौसला फिर हो सबल आशा का खिल जाए कमल तुम साथ तो दो।। By- Dr.Anshul Saxena 

सम्मान- रिश्तों का(Samman Rishton Ka)

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          सम्मान रिश्तों का   घर में दो रोटी ज्यादा बन जाएं, चलेगा। सब्जी की जगह दाल बन जाए ,चलेगा। झाड़ू पोंछा लेट हो जाए,चलेगा। बिना बात का झगड़ा नहीं चलेगा😐 आज की मेरी पोस्ट उन पुरुषों के लिए है जो अपने अहम, ना समझी और तुनक मिजाजी में अपने परिवार में कड़वाहट घोल देते हैं। घर आँगन है कोई जंग का मैदान नहीं है  वह आदमी ही क्या जिसे रिश्तो का मान नहीं है यह घर है हर बात सहज होनी चाहिए बात बे बात ना बहस होनी चाहिए छोटी-छोटी बातों पर बात मत बढ़ाइए घर को घर रहने दें अखाड़ा मत बनाइए अरे तुम किससे लड़ रहे हो? किसको जता रहे हो? जो खुद नहीं सीखे वह किसी और को सिखा रहे हो। अगर कुछ सामान पड़ा है तुम उठा लो अगर खाना लेट हो गया है तो किचन में जाकर थोड़ा हाथ बँटा लो। अगर सब्जी में नमक कम है तो थोड़ा ऊपर से मिला लो, और अगर ज्यादा है तो थोड़ा घी मिला लो अब सामने वाले ने जानबूझकर तो गलती नही करी होंगी न तो तुम किसको समझा रहे हो? बात में बात नहीं पर झगड़ा लगा रहे हो दिलों की कड़वाहट को साफ कीजिए  छोटी-मोटी गलतियों को माफ कीजिए ऐसे ना घर चलते है...

होली है (Holi Hai)

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        हो ली है! हमारे त्यौहार हमारी संस्कृति की धरोहर  हैं। ये हमारे जीवन को हर्ष उल्लास और उमंग से भर देते हैं। उसी प्रकार होली का त्यौहार हमारे जीवन में खुशियों के रंग भर देता है।  कान्हा राधा होली में   डाले रंग गुलाल  चढ़ा प्रेम का रंग जो  राधा हो गईं लाल अलग-अलग रंगों की तरह हमारे आसपास भी रंग-बिरंगे लोग होते हैं। किसी के ऊपर काम का रंग होता है। कोई अपनी धुन में मगन होता है तो कोई रंगीन मिजाज़ होता है। किसी के ऊपर प्यार का रंग चढ़ता है तो कोई पल-पल रंग बदलता है।  रंगों के त्यौहार पर, भर दिल में प्यार के रंग। दूरी सारी भूलकर, हो एक दूजे के संग। रंग से ना डर उससे डर, जो बदले पल पल रंग। रंगों के इस त्यौहार को फ़ीका ना पड़ने दें। एक दूसरे पर खुलकर रंग लगाइए चाहे वह आपके प्यार का हो स्नेह का हो, गुलाल हो या फूलों का रंग हो।  आप सभी को होली की बहुत-बहुत शुभकामनाएं। 🙏💐 By: Dr.Anshul Saxena 

सलीक़ा और तरीक़ा (Saleeka aur Tareeka)

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  हर किसी से बात करने का सलीक़ा और तरीक़ा अलग अलग होता है।  कुछ लोग आपके बिना कहे ही सब कुछ सुन लेते हैं और कुछ लोग आपके बार बार कहने पर भी आपकी बात को सुनना नहीं चाहते। आपकी तहज़ीब और अदब को लोग अपनी मनमानी करने के लिए ग्रीन सिगनल की तरह लेते हैं। ऐसे में आपको अपने कहने का तरीका और सलीका दोनों ही बदलने पड़ते हैं।  तुम्हें बस कितना कहूंगी कि तुम जो भी कहते हो तहज़ीब में रहते हो सुनने वाले बड़ा ग़ौर से सुनते हैं खामोशी तोड़ो तहज़ीब छोड़ो बहरे ज़रा ज़ोर से सुनते हैं। 

बेटियाँ (Betiyan)

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 बेटियाँ  बेटियाँ सबके मुकद्दर में कहाँ होती हैं। अनमोल सा मोती हैं बड़े भाग्य से होती हैं बेटियाँ सबके मुकद्दर में कहाँ होती हैं। कभी गर्भ में ही एक बेटी को मार देते हो। कभी आफताब बन 36 टुकड़ों में काट देते हो। जन्म दे एक जान को हर दर्द सहती हैं। अपनों की खातिर खुद अपनी ही जान देती हैं। अनमोल सा मोती हैं बड़े भाग्य से होती हैं बेटियाँ सबके मुकद्दर में कहाँ होती हैं। कभी शादी में बिक जाते हो कभी उन पर रौब जमाते हो। जो सबको पीछे छोड़ बस तुमसे ही जुड़ जाती हैं। तुम उस पर हाथ उठाते हो वो जीते जी मर जाती हैं। किस्मत वालों की ही बेटियाँ होती हैं जिसकी नियत ही खोटि हो उसकी किस्मत कहाँ होती है। अनमोल सा मोती हैं बड़े भाग्य से होती हैं बेटियाँ सबके मुकद्दर में कहाँ होती हैं। Dr.Anshul Saxena  Hindi Kavita- Betiyan

नव वर्ष शुभकामनाएं (New Year Wishes)

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 नव वर्ष शुभकामनाएं खट्टी मीठी याद लिए, बीते साल की शाम ढली। नव उमंग नव तरंग लिए, नए साल की कली खिली। नई कली जीवन महकाए, हर जीवन में मंगल लाए।। नव वर्ष की शुभकामनाएं💐🙏

नारी - एक चिंगारी ( Naari Ek Chingari)

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 एक चिंगारी नारी अभिमान की आवाज़ में कभी रीति में रिवाज़ में भक्ति है जो उस नारी को शक्ति जो उस चिंगारी को जितना भी उसे दबाओगे एक ज्वाला को भड़काओगे। उस अंतर्मन में शोर है बस चुप वो ना कमज़ोर है जितना तुम उसे मिटाओगे उतना मजबूत बनाओगे। बचपन में थामा था आंचल वो ही पूरक वो ही संबल तुम उसके बिना अधूरे हो तुम नारी से ही पूरे हो जितना तुम अहम बढ़ाओगे अपना अस्तित्व मिटाओगे। By- Dr.Anshul Saxena 

सुकून (Sukoon)

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                          सुकून सुकून एक वह अनमोल खजाना है जो किसी को मिल जाए तो उसके आगे चांदी सोना रुपये पैसे का भी कोई मोल नहीं क्योंकि सुकून को पा सकते हैं खो सकते हैं लेकिन खरीद नहीं सकते। कितनों का यही दर्द कितनों का यही ग़म। ढूंढे जिसे ज़माना मिलता है ज़रा कम। हंसना यहीं रोना यहीं, पाना यहीं खोना यहीं, ना चांदी जहाँ सोना नहीं। दिल का सुकून होना वहीं।। आज उम्र के इस पड़ाव पर हम सभी की जिंदगी चक्की की तरह चलती है। जहां हमें सुकून ढूंढना पड़ता है और जब यह मिलता है तब वह किसी खजाने से कम नहीं लगता। एक ज़माना था जब यह हमेशा ही हमारे पास रहता था। जब दिल में उमंग थी कुछ पाना जुनून था बचपन के थे वो दिन जब दिल का सुकून था। अंत में मैं बस यही कहना चाहूंगी

हिंदी को स्वीकार करो (Hindi ko sweekar karo)

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 हिंदी को स्वीकार करो  (Hindi ko sweekar karo) वंचित अपने अधिकारों से, छलनी अपनों के वारों से, औरों पे पड़ती भारी जो। अपने ही देश में हारी वो।। एबीसी के चक्कर में, हस्ताक्षर में या अक्षर में, खोयी ऐसी हर दफ्तर में, वो निजी हो या सरकारी हो।। अंग्रेज़ी पर इतराते हम और हिंदी से घबराते हम चलो हिंदी को अपनाते हैं, चलो 2 का बटन दबाते हैं, एबीसीडी सीख ली हमने, अब क ख ग भी सिखाते हैं। हेलो हाय को बाय करो, नमस्कार को प्यार करो, हिंदुस्तान के वासी हो, हिंदी को स्वीकार करो।। Dr.Anshul Saxena 

नारी (Naari)

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  नारी   एक नारी की शक्ति का आंकलन करना किसी के बस की बात नहीं है। एक असीम शक्ति का नाम है नारी। जो हर चुनौती हर संघर्ष को हंस के पार करती हैं।  बेटियां अक्सर बेटा बन जाती है लेकिन बेटे बेटियां नहीं बन पाते। अपने घर को बसाने के लिए वह जन्म से मिली अपनी पहचान को हंसते-हंसते त्याग देती है। अपने सपने अपनों के लिए हंसी खुशी न्योछावर कर देती है। अपनी हर भूमिका असाधारण रूप में निभाने वाली नारी को कोई चुनौती नहीं रोक सकती। तुम मान दो तो मान में  सम्मान देती है। जन्म क्या पहचान क्या   वो जान देती है। ना भूल कर यह भूलना  उसे आंकते हो तो छोटी बड़ी हर बात पर  उसे जांचते हो तो  रिश्ते कभी बंधन में  उसे बांटते हो तो जीतेगी वो हर हाल में  जब ठान लेती है।।

समझ दिल की (Samajh Di Ki)

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   समझ दिल की (Samajh Di Ki) यह जिंदगी भी बड़ी अजीब है। ग़ौर से देखो तो प्यार के लिए कम पड़ जाती है और नफ़रत के लिए बहुत बड़ी लगती है। कमाल की बात तो यह है कि हम जिंदगी भर उन्हीं लोगों से लड़ने में मनमुटाव में उलझे रहते हैं जो हमारे आसपास होते हैं या हमारे बेहद करीब होते हैं। सच तो यह है कि इस दिखावे की दुनिया में आपको सच्चे लोग मिल जाएं तो ख़ुद को बहुत ख़ुशकिस्मत समझ लो। कोई ऐसा जो आपको सुनता हो, आपकी फ़िक्र करता हो, आपसे आपके दिल का हाल पूछता हो तो उसे ज़िंदगी भर संजो कर रखिएगा। ऐसी रिश्तों की क़द्र करिएगा जो आपको आप जैसे हैं वैसे अपनाते हैं, जो आपको छोटी-छोटी बातों के लिए आंकते नहीं है, जो आपसे दिल से जुड़ते हैं स्वार्थ से नहीं। ठीक ही है कि कहाँ दर्द कम होता है किसी के हाल पूछने से बस तसल्ली हो जाती है कि कोई अपना है। आपको पता है कभी-कभी दिल दिमाग से ज्यादा समझदारी से काम करता है। वह खुद को हल्का रखने के लिए लोगों के दिखावे को समझते हुए भी नजरअंदाज़ कर देता है।😄 करो महफ़ूज़ वो रिश्ता जो मिल के हाल लेता है। जहां तुम डगमगाते हो तुम्हें वह ढ़ाल देता है। बड़ा नादान है य...

साथ (Saath)

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 साथ (Saath)   मुश्किलें आई है तो हल  निकलेंगे, जो कल भी निकले थे फिर कल निकलेंगे, रुक गए थे कदम जो मंजिल की राह में, साथ होंगे आप तो फिर चल निकलेंगे।।

बिकाऊ रिश्ते (Bikau Rishte)

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 बिकाऊ रिश्ते   आज का ज़माना पहले से कुछ अलग है। महंगाई के इस दौर में हर चीज महंगी बिकती है। इस सूची में रिश्ते भी शामिल हैं। जितना महंगा रिश्ता उतनी मेहमान नवाज़ी।  पहले ज़माने में सुविधाएं भले ही कम थी लेकिन रिश्तों में ठहराव और गहराई होती थी। मिलना जुलना औपचारिक नहीं होता था। त्योहारों में खोखला पन नहीं था। पहले सामने झगड़े होते थे लेकिन मनमुटाव क्षणिक होता था। दिलों की मिठास कम नहीं होती थी। अब दिलों की खटास दिखावे की चाशनी में परोसी जाती है। कह सकते हैं कि  दिल में अब नमी नहीं है  पर दिखावे में कमी नहीं है। जिसको यह बात अभी तक समझ ना आई हो तो नासमझ होना ही बेहतर है। नासमझी ही बेहतर है ना होना समझदार  समझ गए तो समझोगे रिश्तों का व्यापार आज के समय में महाकवि तुलसीदास जी का कथन हमेशा याद रखना चाहिए आवत ही हरषै नहीं नैनन नहीं सनेह।  तुलसी तहां न जाइये कंचन बरसे मेह। जिस समूह में शिरकत होने से वहां के लोग आपसे खुश नहीं होते और वहां लोगों की नजरों में आपके लिए प्रेम या स्नेह नहीं है, तो ऐसे स्थान या समूह में हमें कभी शिरकत नहीं करना चाहिए, भले ही वहां स...

हर घर तिरंगा ( Har Ghar Tiranga)

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  हर घर तिरंगा  ( Har Ghar Tiranga) आजादी का अमृत उत्सव, देश भक्ति में रंग बिरंगा, देश प्रेम का तिलक लगा सब, हर घर में लहराओ तिरंगा।। आतंक पनपने ना पाए, घर के भेदी घर को जाएं, आओ हम ऐसे मिल जाएं, ना फ़साद ना हो फिर दंगा। हर घर में लहराओ तिरंगा।। हर अतिथि का हो अभिनंदन, हर धर्म का करते हम वंदन, इस देश की माटी जैसे चंदन, देश प्रेम पावन ज्यों गंगा। हर घर में लहराओ तिरंगा।।