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नारी - एक चिंगारी ( Naari Ek Chingari)

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 एक चिंगारी नारी अभिमान की आवाज़ में कभी रीति में रिवाज़ में भक्ति है जो उस नारी को शक्ति जो उस चिंगारी को जितना भी उसे दबाओगे एक ज्वाला को भड़काओगे। उस अंतर्मन में शोर है बस चुप वो ना कमज़ोर है जितना तुम उसे मिटाओगे उतना मजबूत बनाओगे। बचपन में थामा था आंचल वो ही पूरक वो ही संबल तुम उसके बिना अधूरे हो तुम नारी से ही पूरे हो जितना तुम अहम बढ़ाओगे अपना अस्तित्व मिटाओगे। By- Dr.Anshul Saxena 

एक बाल (Ek Baal) Part - 1

 एक बाल ( Ek Baal ) Part-1

Hindi Kahani-Ek Baal Part-1

यह कहानी सरकारी पद पर कार्यरत शलभ शर्मा की है जो शुरू से ही होनहार और अंतर्मुखी स्वभाव का व्यक्ति था। दिनभर के काम से थके मांदे लौटे शलभ ने सोने से पहले अपनी अलमारी में से एक किताब निकाली और उसे लेकर आराम कुर्सी पर बैठ गया। किताब खोलते ही वह अपने अतीत के पन्ने कब पलटता चला गया उसे पता ही नहीं चला। 

मानो कल की ही बात थी जब उसके विवाह का विज्ञापन अख़बार में निकाला गया था। पहले दो बार में कोई उपयुक्त वधु ना मिल पाने के कारण यह तीसरी बार था जब शलभ के विवाह के लिए विज्ञापन निकाला गया था।

 शलभ अपने विवाह के प्रस्तावों को देख देख कर खींझ चुका था। अच्छी नौकरी और अच्छी पढ़ाई होने के बावजूद लड़कियां उससे मिलते ही उसे अस्वीकार कर देती थीं। वजह सिर्फ एक थी - शलभ का गंजापन। शलभ के बाल उम्र से पहले ही झड़ने लगे थे। जब वह पढ़ाई कर रहा था तब से ही वह आधा गंजा हो चुका था। तब से ही शलभ लोगों के तानों और मज़ाक का शिकार बनता चला आ रहा था।

हद तो तब हो गई जब उसके किसी पड़ोसी ने यह कहकर चिढ़ाया, "अंकल कब तक विज्ञापन देते रहोगे? अब शादी का विचार छोड़ दो।" अभी शलभ 30 वर्ष का भी नहीं हुआ था। इस तरह के ताने सुन-सुन कर वह कुंठित हो चुका था।

अगले दिन शलभ को किसी लड़की से मिलने जाना था लेकिन अपनी कुंठा में जब उसने अपनी माता-पिता से विवाह न करने की बात की तो उसकी माँ ने उसे समझाया, "बेटा जीवन में हर किसी में कोई ना कोई कमी होती है। पूरा तो कोई भी नहीं होता। चिंता मत करो। तुम्हारे लिए भी कोई ना कोई बनी होगी जो तुम्हें ज़रूर मिलेगी। आजकल अच्छी वधू ढूंढना भी इतना आसान नहीं।"  

अगले दिन शलभ के घर वालों को जिस लड़की से मिलने जाना था वह थी - सुधा। सुधा बहुत ही सीधे, सरल और संकोची स्वभाव की लड़की थी। सुधा की सुंदरता, आकर्षक व्यक्तित्व और लंबे घने बाल सबका मन मोह लेते थे। बचपन में ही उसके मां-बाप के गुज़र जाने के कारण उसका पालन पोषण उसके चाचा-चाची ने किया था। अगले दिन शलभ और उसके घर वाले सुधा से मिलने पहुंचे। हमेशा की तरह 'ना' की अपेक्षा रखते हुए शलभ ने सुधा से ठीक से बात तक नहीं की। महज़ दो- चार औपचारिक बातें करके शलभ और उसके घर वाले अपने घर वापस लौट गए।

शलभ का सुधा से ठीक से बात ना करने के कारण सुधा के घरवालों को लगा शायद शलभ को यह रिश्ता नापसंद था। उधर शलभ का भी सुधा से ठीक से ना बात करने का कारण हमेशा की तरह इस बार भी आपेक्षित 'ना' ही था।

सुधा के घर वाले शलभ के जवाब का इंतज़ार कर रहे थे क्योंकि सुधा ने विवाह के लिए हाँ कर दी थी। सुधा की हाँ ने शलभ को हैरान कर दिया और उसने सुधा से एक बार और बात करने का मन बनाया।

शलभ सुधा से मिला और उसने पूछा, " क्या तुम एक ऐसे इंसान को अपना जीवनसाथी बनाना चाहोगी जिसके सिर पर बाल ना हों?" इस पर सुधा ने कहा, " जीवन साथी वह है जो जीवन भर साथ निभाए। यदि किसी के बाद में बाल चले जाएं तब क्या साथ छोड़ दिया जाएगा?"

इस बात पर शलभ को यह एहसास हुआ कि सुधा अन्य लड़कियों से कितनी अलग थी और शायद वह उसके जीवन में एक अलग रंग भर देगी।

क्रमश: 
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